यहां पूरी योजना एक जगह है: क्या मिलता है, कौन पात्र है, आवेदन कैसे करें, और क्या जांचें।
| योजना | धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान |
|---|---|
| मंत्रालय | जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार |
| फायदा | जनजातीय गांवों में केंद्र और राज्य की योजनाओं का एकीकरण, कुल व्यय 79,150 करोड़ रुपये से अधिक |
| किसे फायदा | जनजातीय परिवार और गांव जिन्हें सरकारी योजनाएं अब तक नहीं मिलीं |
| कैसे दी जाती है | राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और गांव स्तर के शिविरों के ज़रिए |
| कहां संपर्क करें | ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय या जिला जनजातीय कल्याण कार्यालय |
| आवेदन शुल्क | मुफ्त |
एक नज़र में
- यह केंद्र की योजना है जो सभी राज्यों में चलती है।
- यह मौजूदा योजनाओं को उन जनजातीय गांवों तक ले जाती है जो छूट गए थे।
- यह योजना बिरसा मुंडा के नाम पर है, जिन्हें धरती आबा कहा जाता है।
- इसमें आवास, सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
तो यह योजना असल में क्या देती है?
यह योजना हर परिवार को एक नकद रकम नहीं देती। इसके बजाय यह कई सरकारी योजनाओं को जनजातीय गांवों तक एक साथ लाती है।
इसका कुल व्यय 79,150 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें पक्के मकान, सड़क, पीने का पानी, बिजली, सोलर ऊर्जा और मोबाइल मेडिकल यूनिट शामिल हैं।
फायदा हर योजना और गांव के हिसाब से अलग होता है। गांव का सर्वे करके अधिकारी सूची तय करते हैं।
हर योजना की राशि और नियम बदल सकते हैं, इसलिए ताज़ा जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर ज़रूर जांचें।
किसे फायदा मिल सकता है, और कौन छूट जाता है?
मुख्य लक्ष्य वे जनजातीय परिवार और गांव हैं जिन्हें अब तक सरकारी योजनाएं नहीं मिलीं।
योजना में चिन्हित गांवों के जनजातीय परिवारों को पहली प्राथमिकता मिलती है।
बाकी परिवार अपनी पात्रता के अनुसार अलग-अलग योजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यह योजना पूरे भारत के लिए है, लेकिन किन गांवों को शामिल करना है, यह सरकार तय करती है।
यह योजना क्यों शुरू हुई, और इसे कौन चलाता है?
योजना का नाम स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के नाम पर है, जिन्हें लोग धरती आबा कहते हैं।
इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने की थी और इसे जनजातीय कार्य मंत्रालय चलाता है।
इसका उद्देश्य दूरदराज़ के जनजातीय परिवारों तक सरकारी योजनाएं पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री ने इसे जनजातीय गौरव दिवस से भी जोड़ा, जो बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाया जाता है।
कौन से दस्तावेज़ तैयार रखें?
आधार कार्ड और परिवार का विवरण तैयार रखें।
जाति प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक रखें।
ज़मीन या मकान के कागज़ और राशन कार्ड की जानकारी हो तो साथ रखें।
सटीक दस्तावेज़ उस योजना पर निर्भर करते हैं जिसके लिए आप आवेदन करते हैं, इसलिए स्थानीय कार्यालय से पूछ लें।
फायदा पाने का तरीका, एक-एक कदम?
शिविर या सर्वे के समय ग्राम पंचायत, ग्राम सभा या ब्लॉक कार्यालय जाएं।
अधिकारियों को बताएं कि आपके परिवार को किस योजना की ज़रूरत है, जैसे मकान, पानी या बिजली।
वे आपका विवरण दर्ज करेंगे और जांचेंगे कि परिवार पात्र है या नहीं।
मदद के लिए आप जिला जनजातीय कल्याण कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।
स्थिति कैसे जांचें, और कुछ न हो तो क्या करें?
ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय से अपने आवेदन की स्थिति पूछें।
जवाब न मिले तो जिलाधिकारी या जनजातीय कल्याण अधिकारी को लिखित शिकायत दें।
सभी फॉर्म और रसीदों की कॉपी सुरक्षित रखें।
अपना नाम जुड़वाने के लिए किसी एजेंट या बिचौलिए को पैसे न दें। ऐसे भुगतान अवैध हैं।
हेल्पलाइन और ज़रूरी सुझाव
आधिकारिक जानकारी के लिए tribal.nic.in, यानी जनजातीय कार्य मंत्रालय की वेबसाइट देखें।
पैसे या OTP मांगने वाले फर्जी कॉल या वेबसाइट से सावधान रहें।
स्थानीय अधिकारियों से अपनी भाषा में योजना समझाने को कहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इस योजना में कोई तय नकद रकम मिलती है?
नहीं। यह मुख्य रूप से कई सरकारी योजनाओं को जनजातीय गांवों तक एक साथ लाती है। फायदा हर योजना के नियमों पर निर्भर करता है।
क्या व्यक्ति सीधे आवेदन कर सकता है?
आमतौर पर परिवार ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय के ज़रिए आवेदन करते हैं। प्रक्रिया के लिए स्थानीय कार्यालय से पूछें।
क्या आवेदन की अंतिम तिथि है?
यह योजना चरणों में चलती है। ताज़ा समय-सीमा के लिए आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय कार्यालय से पूछें।
क्या आवेदन के लिए कोई शुल्क है?
नहीं। इस योजना के लिए किसी एजेंट या बिचौलिए को कभी पैसे न दें।
आधिकारिक लिंक
यह गाइड योजना के आधिकारिक नियमों पर आधारित है। नियम और रकम बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर ज़रूर जांचें। News Anek सरकारी वेबसाइट नहीं है।