8 नवंबर 2026 देश की खबरें 1 मिनट में। साफ़, जांची-परखी, स्रोत के साथ। 👤 साइन इन मेरी फीड टूल्स English Instagram Facebook X
सरकारी योजना

ई-नाम राष्ट्रीय कृषि बाजार: किसान फसल ऑनलाइन बेचकर बेहतर दाम कैसे पाएं

ई-नाम एक देशव्यापी ऑनलाइन व्यापार मंच है जो APMC मंडियों को जोड़ता है। किसान मोबाइल ऐप या पंजीकृत एजेंट के ज़रिए बेच सकते हैं और ऑनलाइन भुगतान पा सकते हैं।

KotaBelud Sabah Rice-Padi-08
प्रतीकात्मक फोटो: KotaBelud Sabah Rice-Padi-08. Photo: CEphoto, Uwe Aranas / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0

यहां पूरी योजना एक जगह है: क्या मिलता है, कौन पात्र है, आवेदन कैसे करें, और क्या जांचें।

योजना एक नज़र में
योजनाराष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)
मंत्रालयकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (नोडल एजेंसी: SFAC)
फायदाउपज पर ऑनलाइन बोली, पारदर्शी दाम और ऑनलाइन भुगतान
कौन उपयोग कर सकता हैकिसान, व्यापारी, खरीदार और किसान उत्पादक संगठन (FPO)
पैसा कैसे मिलता हैRTGS, NEFT, UPI या बैंक ट्रांसफर से ऑनलाइन, राज्य की सीमा तक कुछ नकद भी
कहां पंजीकरण करेंenam.gov.in, ई-नाम मोबाइल ऐप या आपकी स्थानीय APMC मंडी
पंजीकरण शुल्कमुफ्त

एक नज़र में

  • ई-नाम मौजूदा APMC मंडियों को एक राष्ट्रीय ऑनलाइन बाजार से जोड़ता है।
  • किसान मोबाइल ऐप से या पंजीकृत कमीशन एजेंट के ज़रिए बोली में भाग ले सकते हैं।
  • उपज की तौल, बिक्री और भुगतान ऑनलाइन होता है, आमतौर पर उसी दिन।
  • योजना तभी काम करती है जब आपके राज्य की मंडी ई-नाम से जुड़ी हो।

तो ई-नाम से किसान को असल में क्या मिलता है?

ई-नाम आपकी उपज के लिए बड़ा बाज़ार देता है। कई मंडियों के खरीदार आपकी फसल पर ऑनलाइन बोली लगा सकते हैं।

बोली पारदर्शी होती है। आप ऐप पर दाम और अपने माल की बोली की प्रगति असली समय में देख सकते हैं।

भुगतान ऑनलाइन होता है, इसलिए बिक्री के बाद व्यापारी से नकद के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

राज्य की तय सीमा के अनुसार किसान कुछ भुगतान नकद और बाकी अपने बैंक खाते में ले सकते हैं।

ई-नाम का फायदा कौन ले सकता है, और कौन नहीं?

ई-नाम उन किसानों के लिए है जो किसी जुड़ी हुई APMC मंडी में उपज बेचते हैं। आपके राज्य और मंडी का ई-नाम से जुड़ा होना ज़रूरी है।

किसान ऐप पर खुद बोली लगा सकते हैं, या पंजीकृत कमीशन एजेंट के ज़रिए भी व्यापार कर सकते हैं।

व्यापारी, खरीदार और किसान उत्पादक संगठन भी पंजीकरण करा सकते हैं। FPO को पारदर्शी व्यापार के फायदे के लिए पंजीकरण की सलाह दी जाती है।

जो मंडियां अभी ई-नाम से नहीं जुड़ीं, वहां यह मंच उपलब्ध नहीं है। अपने क्षेत्र के लिए वेबसाइट पर कवरेज सूची देखें।

ई-नाम क्यों शुरू हुआ, और हाल में क्या बदला है?

ई-नाम 14 अप्रैल 2016 को भारत सरकार ने शुरू किया। इसे लघु किसान कृषि-व्यापार संघ (SFAC) चलाता है।

इसका उद्देश्य कृषि उपज के लिए एक राष्ट्रीय बाजार बनाना है। इससे खरीदार और विक्रेता के बीच जानकारी का अंतर भी कम होता है।

राजस्थान और तमिलनाडु सहित कई नई मंडियां हाल के वर्षों में जोड़ी गई हैं। जुड़ी मंडियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

ऐप से गेट एंट्री, UPI से भुगतान और किसान डेटाबेस जैसी सुविधाएं समय के साथ जोड़ी गई हैं।

कौन से कागज़ तैयार रखें?

आधार कार्ड और अपने नाम का बैंक खाता तैयार रखें, जो मोबाइल नंबर से जुड़ा हो।

मोबाइल फोन पास रखें, क्योंकि ऐप और OTP के लिए इसकी ज़रूरत होती है।

अगर आप एजेंट के ज़रिए बेचते हैं, तो उसका पंजीकरण विवरण अपने पास रखें। उपज का ब्योरा और मंडी की एंट्री स्लिप भी साथ रखें।

ई-नाम पर व्यापार कैसे शुरू करें, एक-एक कदम?

ई-नाम मोबाइल ऐप डाउनलोड करें, या enam.gov.in पर जाकर किसान पंजीकरण का विकल्प चुनें।

अपना मोबाइल नंबर, आधार विवरण और बैंक विवरण भरें, और OTP से सत्यापित करें।

अपना राज्य और मंडी चुनें, और अपनी उपज का ब्योरा जोड़ें।

मंडी पहुंचने पर एडवांस गेट एंट्री सुविधा से समय बचाएं। फिर ऐप पर बोली की प्रगति देखें।

भुगतान कैसे मिलता है, और अटक जाए तो क्या करें?

बोली पूरी होने के बाद भुगतान ऑनलाइन आपके बैंक खाते में आता है, आमतौर पर उसी दिन।

अगर भुगतान में देरी हो, तो पहले ऐप में लेन-देन की स्थिति देखें। फिर अपनी मंडी कार्यालय से संपर्क करें।

पंजीकरण या व्यापार में मदद के लिए ई-नाम का टोल-फ्री नंबर 1800 270 0224 पर कॉल करें।

कौन सी सावधानियां रखें?

ई-नाम पर पंजीकरण के लिए किसी को पैसे न दें। पंजीकरण और व्यापार आधिकारिक पोर्टल और मंडी कार्यालय से मुफ्त है।

OTP या बैंक पासवर्ड मांगने वाले फोन या संदेशों से सावधान रहें। ये किसी के साथ साझा न करें।

अपनी उपज बेचने जाने से पहले जांच लें कि आपके राज्य की कौन सी मंडियां ई-नाम से जुड़ी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ई-नाम का उपयोग मुफ्त है?

हां, किसान ई-नाम पर मुफ्त में पंजीकरण और व्यापार कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए किसी को पैसे न दें।

क्या मैं ऐप की बजाय एजेंट के ज़रिए बेच सकता हूं?

हां। आप ऐप पर खुद व्यापार कर सकते हैं, या पंजीकृत कमीशन एजेंट के ज़रिए बेच सकते हैं।

क्या मुझे नकद भुगतान मिलेगा?

कुछ हद तक, अगर आपका राज्य इसकी अनुमति देता है। राज्य की सीमा तक नकद मिलता है, और बाकी आपके बैंक खाते में आता है।

क्या ई-नाम हर मंडी में उपलब्ध है?

नहीं। यह केवल उन मंडियों में उपलब्ध है जो ई-नाम से जुड़ी हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर सूची देखें।

ई-नाम कौन चलाता है?

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत लघु किसान कृषि-व्यापार संघ (SFAC) नोडल एजेंसी है।

सरकारी योजना

हम कैसे रिपोर्ट करते हैं। News Anek की हर खबर कम से कम दो भरोसेमंद स्रोतों से जांची जाती है, और हम उन स्रोतों के नाम देते हैं। कोई गलती दिखी? contact@newsanek.com पर लिखें, और हमारी सुधार नीति व संपादकीय नीति पढ़ें।