समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद को फिर से खड़ा करने के लिए अपनी रणनीति बदल रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद खुलकर होने वाली अलगाववादी गतिविधियों पर काफी रोक लगी है।
अब ISI का "कश्मीर डेस्क" तुरंत हिंसा या बड़े आतंकी हमलों की जगह लंबे समय की और धीमी योजना पर काम कर रहा है।
यह रिपोर्ट 3 नवंबर 2026 को प्रकाशित हुई।
एक नज़र में
- रिपोर्ट के अनुसार ISI अब बड़े हमलों के बजाय लंबी और शांत रणनीति अपना रही है।
- पूर्व हुर्रियत सदस्यों और सालों से चुप बैठे ओवरग्राउंड वर्करों (OGW) से संपर्क की बात कही गई है।
- इन लोगों को राजनीति, सरकारी सेवा और शिक्षण संस्थानों जैसे वैध मंचों में जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
- सोशल मीडिया पर निराश युवाओं को भी निशाना बनाने का दावा है।
क्या है रिपोर्ट में दावा
खुफिया अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि ISI उन पूर्व हुर्रियत कॉन्फ्रेंस सदस्यों और OGW से जुड़ रही है, जो कई साल से कम सक्रिय रहे हैं।
ये लोग काफी हद तक सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बाहर हैं।
इन्हें मुख्यधारा की राजनीति, सरकारी नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों और दूसरे वैध संगठनों में जगह बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक मकसद यह है कि इन्हीं स्थापित रास्तों से अलगाववादी बातों को धीरे-धीरे फिर सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाया जाए, ताकि प्रशासन के लिए इसे पकड़ना मुश्किल हो।
"लंबे खेल" का तरीका
बताया गया है कि नई रणनीति में ऐसी खुली गतिविधियों से बचा जा रहा है, जिन पर तुरंत राजद्रोह कानून लगे या खुफिया एजेंसियों का ध्यान जाए।
इसके बजाय अनौपचारिक बैठकों और कार्यस्थलों जैसी निजी जगहों पर अलगाववाद पर बातचीत को बढ़ावा देने की योजना बताई गई है।
रिपोर्ट इसे पहले के तरीकों, यानी ज़ोरदार प्रदर्शनों और आतंकी भर्ती, से ज़्यादा खतरनाक मानती है, क्योंकि यह बिना सीधे टकराव के कश्मीर के सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने में धीरे-धीरे पैठ बनाने की कोशिश है।
साथ ही ISI पर सोशल मीडिया खंगालकर निराश युवाओं की पहचान करने और उन्हें चुपचाप प्रभावित करने का भी आरोप है।
- 1पुराने चेहरों से संपर्ककम सक्रिय पूर्व हुर्रियत और OGW सदस्यों से जुड़ना, जो सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बाहर हैं
- 2वैध रास्तों में जगहमुख्यधारा की राजनीति, सरकारी नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों और वैध संगठनों में जगह बनाने को प्रोत्साहन
- 3निजी बैठकेंअनौपचारिक बैठकों और कार्यस्थलों जैसी निजी जगहों पर अलगाववाद पर बातचीत बढ़ाना
- 4खुली गतिविधियों से बचावऐसी खुली गतिविधियों से बचना जिन पर तुरंत राजद्रोह कानून लगे या खुफिया एजेंसियों का ध्यान जाए
- 5सोशल मीडिया से पहचानसोशल मीडिया खंगालकर निराश युवाओं की पहचान करना और उन्हें चुपचाप प्रभावित करना
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
पाठकों के लिए क्यों अहम
यह रिपोर्ट अधिकारियों के हवाले से दी गई जानकारी पर आधारित है।
स्रोत में किसी आधिकारिक बयान, नाम या ठोस मामले का उल्लेख नहीं है, और आगे की कार्रवाई को लेकर भी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
ऐसे दावों को सावधानी से पढ़ना चाहिए, खासकर सोशल मीडिया पर, जहां युवाओं तक भ्रामक बातें आसानी से पहुंच सकती हैं।
आगे सुरक्षा एजेंसियों या सरकार की ओर से कोई बयान आने पर तस्वीर और साफ होगी।