यहां पूरी योजना एक जगह है: क्या मिलता है, कौन पात्र है, आवेदन कैसे करें, और क्या जांचें।
| योजना | मिशन इंद्रधनुष और गहन मिशन इंद्रधनुष (IMI) |
|---|---|
| मंत्रालय | स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत |
| फायदा | बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए 11 या ज़्यादा बीमारियों के मुफ्त टीके |
| कौन लाभ ले सकता है | दो साल तक के बच्चे और गर्भवती महिलाएं |
| टीके कैसे मिलते हैं | सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, उप-केंद्र और विशेष टीकाकरण सत्र में मुफ्त |
| कहां जाएं | नज़दीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, उप-केंद्र या आंगनवाड़ी, या U-WIN और CoWIN पोर्टल से |
| लागत | मुफ्त |
एक नज़र में
- टीके बच्चों और माताओं को गंभीर, जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं।
- दो साल से कम उम्र के बच्चे और गर्भवती महिलाएं मुख्य लक्ष्य हैं।
- विशेष अभियान चरणों में चलते हैं, इसलिए अपने इलाके की तारीख जांचें।
- सरकारी केंद्रों पर टीके मुफ्त हैं। किसी एजेंट को पैसे न दें।
तो बच्चे या गर्भवती महिला को असल में क्या मिलता है?
मिशन इंद्रधनुष कई गंभीर बीमारियों के टीके मुफ्त देता है।
इसमें डिफ्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, खसरा, टीबी, हेपेटाइटिस B, और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप B से होने वाली मेनिनजाइटिस व निमोनिया के टीके शामिल हैं।
रोटावायरस और जापानी एन्सेफलाइटिस के टीके कुछ चुने हुए राज्यों और ज़िलों में दिए जाते हैं। रूबेला और निमोनिया के टीके बाद के चरणों में जोड़े गए।
ये टीके एक सुरक्षा कवच हैं। ये छोटे बच्चों और माताओं के लिए जानलेवा संक्रमण से बचाते हैं।
ये टीके किसे लगवाने चाहिए?
यह मिशन दो साल से कम उम्र के हर बच्चे के लिए है।
इसमें वे गर्भवती महिलाएं भी आती हैं जो कोई डोज़ छूट जाने या नियमित टीकाकरण से बाहर रह जाने के कारण पीछे रह गईं।
इसमें आय की कोई सीमा नहीं है। भारत में कोई भी बच्चा या गर्भवती महिला सरकारी केंद्र पर मुफ्त टीके लगवा सकती है।
जिन बच्चों और गर्भवती महिलाओं की पहले की डोज़ छूटी है, उन्हें अभी बकाया डोज़ भी लगवानी चाहिए।
यह मिशन क्या है, और इसकी शुरुआत क्यों हुई?
यूनिवर्सल इम्युनाइज़ेशन प्रोग्राम 1978 में एक्सपैंडेड प्रोग्राम ऑफ इम्युनाइज़ेशन के नाम से शुरू हुआ था। 1985 में इसमें बदलाव किया गया।
मिशन इंद्रधनुष 25 दिसंबर 2014 को स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुरू किया। इसका लक्ष्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं का पूरा टीकाकरण है।
2017 में इसे गहन मिशन इंद्रधनुष के रूप में तेज़ किया गया, और बाद में IMI 4.0 और 5.0 जैसे अभियान चले।
ये अभियान उन ज़िलों पर ध्यान देते हैं जहां अब भी बहुत से बच्चे और गर्भवती महिलाएं टीके से छूट जाते हैं।
वहां जाते समय क्या तैयार रखें?
बच्चे का टीकाकरण कार्ड साथ रखें। गर्भवती हैं तो प्रेग्नेंसी कार्ड भी ले जाएं।
माता और बच्चे का आधार कार्ड या जन्म का विवरण, अगर हो, तो तैयार रखें।
अगर CoWIN या U-WIN पोर्टल इस्तेमाल करते हैं, तो अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर रखें।
पहले के टीकाकरण के रिकॉर्ड भी साथ ले जाएं, ताकि स्वास्थ्य कर्मी जान सकें कि कौन सी डोज़ बाकी है।
टीके कैसे लगवाएं, एक-एक कदम?
नज़दीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, उप-केंद्र या आंगनवाड़ी जाएं। नियमित टीकाकरण का दिन पूछें।
अपने गांव या शहर में विशेष मिशन इंद्रधनुष सत्र पर भी नज़र रखें। इसकी सूचना पहले दी जाती है।
आपकी आशा कार्यकर्ता या ANM तारीख और सत्र की जगह बता सकती हैं।
स्वास्थ्य कर्मी छूटी डोज़ वाले बच्चों और माताओं को ढूंढने घर भी आ सकते हैं।
डोज़ छूट जाए या शक हो तो क्या करें?
घबराएं नहीं। नज़दीकी केंद्र जाएं और बकाया डोज़ मांगें। वह बाद में भी दी जा सकती है।
टीकाकरण कार्ड संभाल कर रखें। उसमें दिखता है कौन सी डोज़ लगी और कौन सी बाकी है।
मदद के लिए अपनी आशा कार्यकर्ता, ANM या नज़दीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से पूछें।
धोखे से सावधान रहें। सरकारी केंद्रों पर टीके मुफ्त हैं, इसलिए इनके लिए किसी को पैसे न दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या टीका सच में मुफ्त है?
हां। सरकारी केंद्रों पर मिशन इंद्रधनुष के तहत दिए जाने वाले टीके मुफ्त हैं।
क्या गर्भवती महिला भी टीके लगवा सकती है?
हां। जिन गर्भवती महिलाओं की डोज़ छूटी है, वे भी इस मिशन में शामिल हैं।
क्या आवेदन की कोई आखिरी तारीख है?
कोई तय आखिरी तारीख नहीं है। विशेष अभियान चरणों में चलते हैं, इसलिए स्थानीय तारीख जांचें।
नियमित टीकाकरण और मिशन इंद्रधनुष में क्या फर्क है?
नियमित टीकाकरण पूरे साल दिया जाता है। मिशन इंद्रधनुष विशेष अभियान जोड़ता है, ताकि छूटे हुए बच्चों और माताओं तक पहुंचा जा सके।
आधिकारिक लिंक
यह गाइड योजना के आधिकारिक नियमों पर आधारित है। नियम और रकम बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर ज़रूर जांचें। News Anek सरकारी वेबसाइट नहीं है।