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सरकारी योजना

वन स्टॉप सेंटर (सखी) योजना: हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए एक ही जगह मुफ्त मदद

सखी वन स्टॉप सेंटर योजना हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, पुलिस और कानूनी मदद, काउंसलिंग और अल्पकालिक आश्रय देती है। जानिए कौन इसका लाभ ले सकता है और अपने नज़दीकी सेंटर तक कैसे पहुंचें।

Village women celebrating holi festival
प्रतीकात्मक फोटो: Village women celebrating holi festival. Photo: Nayan j Nath / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

यहां पूरी योजना एक जगह है: क्या मिलता है, कौन पात्र है, आवेदन कैसे करें, और क्या जांचें।

योजना एक नज़र में
योजनावन स्टॉप सेंटर योजना, जिसे सखी भी कहते हैं
मंत्रालयमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार
फायदामुफ्त चिकित्सा, कानूनी मदद, पुलिस सहायता, काउंसलिंग और पांच दिन तक का आश्रय
कौन लाभ ले सकता हैहिंसा झेल चुकी कोई भी महिला, 18 साल से कम उम्र की लड़कियों समेत
कैसे मिलता हैसेंटर पर सीधे सेवा, कोई नकद भुगतान नहीं
कहां संपर्क करेंआपके जिले का सखी वन स्टॉप सेंटर, आपात स्थिति में पुलिस 112
शुल्कमुफ्त

एक नज़र में

  • सेवाएं मुफ्त हैं और एक ही जगह उपलब्ध हैं।
  • कोई भी महिला जाति, धर्म, वर्ग या वैवाहिक स्थिति की परवाह किए बिना मदद मांग सकती है।
  • 18 साल से कम उम्र की लड़कियों को किशोर न्याय और POCSO अधिकारियों की मदद से सहायता मिलती है।
  • आश्रय अस्थायी होता है, आमतौर पर पांच दिन तक।

तो सेंटर पर महिला को असल में क्या मिलता है?

वन स्टॉप सेंटर एक ही छत के नीचे मदद देता है। आपको दफ्तर-दफ्तर भटकना नहीं पड़ता।

यहां आपातकालीन बचाव, चिकित्सा सहायता, पुलिस मदद, कानूनी सहायता और मनो-सामाजिक काउंसलिंग मिलती है।

अल्पकालिक आश्रय उपलब्ध है, आमतौर पर पांच दिन तक। संकट में फंसी महिलाओं और उनके बच्चों को भोजन, कपड़े और स्वच्छता सामग्री भी दी जा सकती है।

अदालत और अधिकारियों से जुड़ने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी है।

इस सेंटर का लाभ कौन ले सकता है?

यह योजना उन सभी महिलाओं के लिए है जिन्होंने निजी या सार्वजनिक जगह पर हिंसा झेली है।

आपकी जाति, वर्ग, धर्म, क्षेत्र, वैवाहिक स्थिति या यौन रुझान कुछ भी हो, इससे फर्क नहीं पड़ता।

18 साल से कम उम्र की लड़कियां भी मदद ले सकती हैं। उनके मामले में सेंटर किशोर न्याय अधिनियम और POCSO अधिनियम के अधिकारियों के साथ काम करता है।

यह केंद्र की योजना है, इसलिए पूरे भारत में चलती है। यह किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है।

यह योजना क्यों शुरू हुई, और इसमें क्या बदला है?

यह योजना 1 अप्रैल 2015 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने शुरू की थी।

इसकी ज़रूरत इसलिए पड़ी क्योंकि मदद मांगते समय महिलाओं को समाज के दबाव, बदले के डर और जटिल कानूनी व स्वास्थ्य प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है।

2022-23 से यह योजना मिशन शक्ति के अंतर्गत संबल उप-योजना में शामिल कर दी गई है।

नए सेंटर बन रहे हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में कई सेंटर चल रहे हैं और कई जिलों में नए बन रहे हैं।

कौन से कागज़ तैयार रखें?

मदद मांगने के लिए आपको ज़्यादा कागज़ों की ज़रूरत नहीं है। पहले सुरक्षा ज़रूरी है।

अगर आपके पास आधार कार्ड, फोटो पहचान पत्र, या कोई पुलिस या मेडिकल रिकॉर्ड है, तो उसकी कॉपी साथ रखें।

कागज़ जुटाने में देर न करें। सेंटर का स्टाफ बता देगा कि और क्या चाहिए।

सेंटर तक कैसे पहुंचें, एक-एक कदम?

अपने जिले का नज़दीकी वन स्टॉप सेंटर ढूंढें। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट देखें, या जिला प्रशासन या स्थानीय थाने से पूछें।

आप बिना अपॉइंटमेंट के, दिन या रात किसी भी समय सीधे जा सकती हैं।

आपात स्थिति में पुलिस के लिए 112 पर फोन करें। पुलिस आपको सेंटर तक पहुंचा सकती है।

स्टाफ आपकी शिकायत दर्ज करेगा, और एक केस वर्कर हर कदम पर आपका साथ देगा।

अगर सेंटर पर सीधे नहीं जा सकतीं तो?

कुछ सेवाएं पुलिस, महिला हेल्पलाइन और जिले के बाल संरक्षण या महिला सेल के ज़रिए भी मिलती हैं।

अगर अभी खतरे में हैं, तो इंतज़ार न करें। पहले 112 पर कॉल करें।

सेंटर या हेल्पलाइन से पूछें कि आपके इलाके में कौन सी सेवाएं उपलब्ध हैं, क्योंकि हर जिले में सुविधा अलग हो सकती है।

हेल्पलाइन, शिकायत और ज़रूरी सुझाव

किसी भी एजेंट या व्यक्ति को पैसे न दें जो जल्दी जगह या तुरंत कार्रवाई का वादा करे। सेंटर की सेवाएं मुफ्त हैं।

जिस स्टाफ से बात करें, उसका नाम, तारीख और समय लिख लें।

आधिकारिक जानकारी और ताज़ा संपर्क के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट wcd.gov.in देखें।

नियम और सेंटर के स्थान बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी आधिकारिक साइट या अपने जिला कार्यालय से पक्की करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या वन स्टॉप सेंटर की सेवा मुफ्त है?

हां, हिंसा झेल चुकी महिलाओं के लिए सेंटर की सेवाएं मुफ्त हैं।

क्या 18 साल से कम उम्र की लड़की मदद ले सकती है?

हां। सेंटर किशोर न्याय अधिनियम और POCSO अधिनियम के अधिकारियों के साथ मिलकर 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की मदद करता है।

महिला आश्रय में कितने दिन रह सकती है?

आश्रय अस्थायी है और आमतौर पर पांच दिन तक उपलब्ध होता है, स्थिति के अनुसार।

क्या सेंटर जाने के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है?

नहीं। आप सीधे जा सकती हैं, क्योंकि सेंटर तुरंत मदद देने के लिए बना है।

क्या मैं दूसरे राज्य से हूं तो भी मदद मिलेगी?

हां। यह केंद्र की योजना है और पूरे भारत में लागू है, कोई भी महिला मदद मांग सकती है।

इस योजना को कौन चलाता है?

इसे भारत सरकार का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय चलाता है, और इसे जिला स्तर पर लागू किया जाता है।

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