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राजनीति

तमिलनाडु की पेरियार लाइब्रेरी की किताबों में गलतियों के आरोप, राजनीतिक विवाद तेज़

लेखक पेरुमल मुरुगन ने लाइब्रेरी की कई किताबों में तथ्यों की गलतियाँ बताई हैं। डीएमके ने कुछ लेखकों और प्रकाशक के चयन पर सवाल उठाए हैं। दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक खींचतान जारी है।

Parliament of India in New Delhi 06
प्रतीकात्मक फोटो: Parliament of India in New Delhi 06. Photo: Pinakpani / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

तमिलनाडु में एक नई लाइब्रेरी इन दिनों राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। यह कोयंबटूर में है और इसका नाम पेरियार अरिवुलगम है।

इसका हाल ही में उद्घाटन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय ने किया।

यह लाइब्रेरी पिछली डीएमके सरकार का सपना प्रोजेक्ट थी। लेखक पेरुमल मुरुगन ने लाइब्रेरी जाकर उसके शेल्फ़ पर रखी किताबें देखीं।

इसके बाद उन्होंने किताबों की खरीद में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया है।

एक नज़र में

  • लेखक पेरुमल मुरुगन ने कोयंबटूर की पेरियार अरिवुलगम लाइब्रेरी की किताबों में तथ्यों की गलतियाँ बताई हैं।
  • एक किताब में तमिलनाडु के पहले मुख्यमंत्री का नाम ऐसा लिखा है, जिसे आधिकारिक रिकॉर्ड सही नहीं मानता।
  • किताबों की खरीद को लेकर डीएमके और टीवीके के बीच विवाद है।
  • अभी साफ़ नहीं है कि किताबें कब खरीदी गईं और खरीद को किसने मंज़ूरी दी।

एक किताब में क्या गलत लिखा है?

यह जानकारी टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में दी गई है। किताब तमिलनाडु ओरु पार्वई है, जिसे धनलक्ष्मी अर्जुन ने लिखा है।

इसमें 1947 में आज़ादी के समय पहले मुख्यमंत्री के रूप में मुथुवेलु सुब्बैया अय्यर का नाम लिखा है।

रिकॉर्ड इससे अलग कहता है। आज़ादी के समय मद्रास के प्रीमियर ओ.पी. रामास्वामी रेड्डियार थे, जिन्होंने मार्च 1947 में पद संभाला था। के.

कामराज 1954 से 1963 तक मुख्यमंत्री रहे, लेकिन वे सी. राजगोपालाचारी के बाद आए थे।

क्या दूसरी किताबों में भी गलतियाँ हैं?

मुरुगन ने कुछ और किताबों की तरफ़ भी ध्यान दिलाया है। भारतियार कथैकल किताब में लेखक के रूप में मनीषा सरवनन का नाम है।

उनके मुताबिक़ यह साफ़ नहीं है कि यह भारतियार की कहानियों का संग्रह है या उनकी कहानियों पर लिखी किताब।

एक और किताब नलदियार को दार्शनिक बताती है। लेकिन नलदियार उन छंदों का संग्रह है, जो जैन साधुओं के एक समूह से जुड़े हैं।

इसके लिए किसी मंत्री ने भी सवाल उठाए हैं, और कीलडी पर लिखी किताब की तस्वीरों पर भी आपत्ति जताई गई है।

इस विवाद का राजनीतिक पहलू क्या है?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़ किताबों की खरीद को लेकर टीवीके और डीएमके के बीच विवाद है।

डीएमके ने कुछ लेखकों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं, खासकर त्रिशा विजय के नाम पर। उसने प्रकाशक सिग्मा प्रिंटर्स के चयन की भी आलोचना की है।

डीएमके ने मुख्यमंत्री के बेटे से संभावित संबंधों के आरोप भी लगाए हैं। उसने खरीद की मुहर के समय को विजय के जन्मदिन से जोड़ा है।

ये आरोप हैं, और इन पर कोई निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

तो आगे क्या होगा? मुरुगन का कहना है कि सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए। तब तक यह साफ़ नहीं है कि किताबें कब खरीदी गईं और खरीद को किसने मंज़ूरी दी।

समझिए

पहले क्या हुआ

  • पेरियार अरिवुलगम लाइब्रेरी कोयंबटूर में है और यह पिछली डीएमके सरकार का सपना प्रोजेक्ट था।
  • इस लाइब्रेरी का हाल ही में उद्घाटन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय ने किया।
  • लेखक पेरुमल मुरुगन ने लाइब्रेरी जाकर किताबें देखीं और खरीद के तरीके में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया है।

यह क्यों अहम है

इस विवाद से यह सवाल उठता है कि लाइब्रेरी के लिए किताबें कैसे चुनी और खरीदी जाती हैं, और उनकी सटीकता कैसे जांची जाती है।

आगे क्या

  • अभी साफ़ नहीं है कि किताबें कब खरीदी गईं और खरीद को किसने मंज़ूरी दी।
  • मुरुगन ने कहा है कि सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

स्रोत

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