यहां पूरी योजना एक जगह है: क्या मिलता है, कौन पात्र है, आवेदन कैसे करें, और क्या जांचें।
| योजना | पीएम ई-ड्राइव (PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement) |
|---|---|
| मंत्रालय | भारी उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार |
| फायदा | बैटरी और वाहन की कीमत के आधार पर सब्सिडी |
| कौन लाभ ले सकता है | पात्र श्रेणी के पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीदार और मालिक; दावा निर्माता करते हैं |
| पैसा कैसे मिलता है | निर्माता सब्सिडी वाली कीमत पर बेचते हैं और सरकार अंतर की भरपाई करती है |
| कहां देखें | pmedrive.heavyindustries.gov.in और ई-ट्रक व ई-बस के श्रेणी पोर्टल |
| आवेदन शुल्क | मुफ्त |
एक नज़र में
- योजना में दोपहिया, तिपहिया, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक, ई-बस और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
- ई-2W को सब्सिडी के लिए एडवांस बैटरी चाहिए। सिर्फ पंजीकृत ई-2W गिने जाते हैं।
- पहले की तुलना में सब्सिडी कम है, और योजना फंड की सीमा से बंधी है।
- ई-2W के दावे जमा करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2027 है।
तो असल में क्या मिलता है?
सब्सिडी वाहन के प्रकार पर निर्भर है, इसलिए एक ही रकम नहीं है।
इलेक्ट्रिक दोपहिया के लिए इंसेंटिव 2,500 रुपये प्रति kWh बैटरी क्षमता है, जो अधिकतम 5,000 रुपये प्रति वाहन तक है। यह 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 के बीच पंजीकृत वाहनों पर लागू है।
इंसेंटिव उस रकम या फैक्टरी कीमत के 15 प्रतिशत, जो भी कम हो, तक सीमित है। पात्र ई-2W की अधिकतम फैक्टरी कीमत 1.5 लाख रुपये है।
ई-एम्बुलेंस के लिए इंसेंटिव, 30,000 रुपये गुणा बैटरी kWh, या फैक्टरी कीमत के 35 प्रतिशत, में से कम होता है।
ई-ट्रक के लिए यह 5,000 रुपये गुणा बैटरी kWh, फैक्टरी कीमत का 10 प्रतिशत (1.25 करोड़ रुपये तक), या वजन के आधार पर अधिकतम सीमा, इनमें सबसे कम होता है।
रकम बदल सकती है। खरीदने से पहले मौजूदा आंकड़े आधिकारिक साइट पर जरूर जांचें।
कौन से वाहन और खरीदार शामिल हैं?
दोपहिया: व्यावसायिक और निजी या कॉर्पोरेट मालिकाना वाले पंजीकृत ई-2W दोनों पात्र हैं, पर सिर्फ एडवांस बैटरी वाले।
तिपहिया: योजना में ई-रिक्शा, ई-कार्ट और L5 श्रेणी के वाहन आते हैं। यह सिर्फ व्यावसायिक उपयोग के लिए पंजीकृत ई-3W पर लागू है।
ई-एम्बुलेंस: AIS 125 के तहत पेशेंट ट्रांसपोर्ट वाहन, टाइप B, टाइप C और टाइप D बेसिक या एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस पात्र हैं।
ई-ट्रक: केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार N2 (3.5 से 12 टन) और N3 (12 से 55 टन) श्रेणी पात्र हैं।
ई-बस: योजना 40 लाख से ज्यादा आबादी वाले नौ बड़े शहरों पर केंद्रित है, जिनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और सूरत हैं।
यह योजना पूरे भारत के लिए है, इसलिए किसी खास राज्य में रहना जरूरी नहीं है।
यह योजना क्यों शुरू हुई, और क्या बदला है?
पीएम ई-ड्राइव को सितंबर 2024 में कैबिनेट की मंज़ूरी मिली। इसने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम की जगह ली, जो अप्रैल से सितंबर 2024 तक चली।
पुरानी FAME योजनाएं ज्यादातर व्यक्तिगत खरीदारों पर केंद्रित थीं। पीएम ई-ड्राइव अपने खर्च का लगभग 40 प्रतिशत इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन में लगाती है।
सरकार ने ई-2W सब्सिडी 31 मार्च 2028 तक बढ़ाई है, और कुल योजना खर्च 11,900 करोड़ रुपये किया है।
योजना फंड की सीमा से बंधी है। कुल रकम या किसी हिस्से का फंड खत्म हो जाए, तो वह हिस्सा पहले बंद हो सकता है।
कौन से कागज़ तैयार रखें?
वाहन के रजिस्ट्रेशन के कागज़ और निर्माता या डीलर का इनवॉइस तैयार रखें।
बैटरी की जानकारी, जैसे kWh क्षमता, और डीलर से फैक्टरी कीमत का विवरण रखें।
पहचान प्रमाण और पता प्रमाण रखें, और अगर दावा सीधे आपके नाम से है तो बैंक विवरण भी।
ई-ट्रक, ई-बस और ई-एम्बुलेंस में कागज़ी काम आमतौर पर ऑपरेटर या कंपनी करती है। सही सूची के लिए श्रेणी पोर्टल देखें।
लाभ कैसे मिलता है?
ज़्यादातर खरीदार खुद सब्सिडी के लिए आवेदन नहीं करते। सब्सिडी निर्माता या डीलर के ज़रिए मिलती है।
ऐसा पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहन चुनें जो बैटरी और कीमत के नियमों पर खरा उतरे। डीलर से पूछें कि कीमत पहले से सब्सिडी वाली है या नहीं।
निर्माता सरकार से अंतर की रकम का दावा करता है। दावे की प्रक्रिया आधिकारिक पोर्टल पर होती है।
ई-ट्रक के लिए ई-ट्रक पोर्टल का इस्तेमाल करें। ई-बस के लिए मौजूदा प्रक्रिया आधिकारिक पीएम ई-ड्राइव साइट पर देखें।
सब्सिडी न दिखे या दावा अटक जाए तो क्या करें?
सबसे पहले डीलर या निर्माता से पूछें कि वाहन पंजीकृत है और पात्र है या नहीं।
जिस श्रेणी का वाहन आप खरीद रहे हैं, उसकी ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक पीएम ई-ड्राइव वेबसाइट देखें।
ऐसे एजेंटों से सावधान रहें जो फीस लेकर जल्दी सब्सिडी दिलाने का वादा करें। आधिकारिक साइट जांचे बिना इस योजना के लिए किसी को पैसे न दें।
खरीदने से पहले कुछ ज़रूरी सुझाव?
पक्का करें कि वाहन पंजीकृत है और दोपहिया सब्सिडी के लिए ज़रूरी एडवांस बैटरी वाला है।
कीमत डीलर से पक्की करें, और सब्सिडी की रकम लिखित में मांगें।
याद रखें कि योजना फंड से बंधी है, इसलिए अगर सब्सिडी के साथ खरीदने की योजना है तो देर न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पीएम ई-ड्राइव सीधे खरीदार को पैसे देती है?
आमतौर पर नहीं। सब्सिडी निर्माता को दी जाती है, जो कीमत कम करते हैं। फिर सरकार उनकी भरपाई करती है।
क्या सब्सिडी की कोई आखिरी तारीख है?
हां। ई-2W के दावे जमा करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2027 है, और योजना 31 मार्च 2028 तक चलती है।
क्या सेकेंड-हैंड इलेक्ट्रिक वाहन पर सब्सिडी मिलती है?
योजना नए पंजीकृत वाहनों पर लागू है। खरीदने से पहले आधिकारिक साइट या डीलर से पुष्टि करें।
क्या सब्सिडी की रकम बदल सकती है?
हां, रकम पहले भी बदली गई है और आगे भी बदल सकती है। मौजूदा आंकड़े आधिकारिक साइट पर देखें।
क्या आवेदन के लिए कोई शुल्क है?
नहीं। आधिकारिक पोर्टल या डीलर के ज़रिए आवेदन मुफ्त है। पैसे मांगने वाले एजेंटों से बचें।
आधिकारिक लिंक
यह गाइड योजना के आधिकारिक नियमों पर आधारित है। नियम और रकम बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर ज़रूर जांचें। News Anek सरकारी वेबसाइट नहीं है।