यहां पूरी योजना एक जगह है: क्या मिलता है, कौन पात्र है, आवेदन कैसे करें, और क्या जांचें।
| योजना | प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) |
|---|---|
| मंत्रालय या विभाग | फार्मास्यूटिकल्स विभाग, भारत सरकार (पहले रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अधीन) |
| फायदा | गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाइयां, सर्जिकल सामान और सैनिटरी नैपकिन कम दाम पर |
| कौन ले सकता है | पूरे भारत में सभी लोग |
| कैसे मिलता है | जन औषधि केंद्र पर काउंटर से खरीदारी |
| स्टोर कहां खोजें | janaushadhi.gov.in या अपने नज़दीकी जन औषधि केंद्र पर |
| खरीदने का खर्च | स्टोर पर कम जेनेरिक दाम पर भुगतान |
एक नज़र में
- जेनेरिक दवाइयां ब्रांडेड दवाओं जितनी असरदार हैं, पर दाम कम हैं।
- 2,000 से ज़्यादा जेनेरिक दवाइयां और 300 से ज़्यादा सर्जिकल सामान बिकते हैं।
- सुविधा सैनिटरी नैपकिन हर एक 1 रुपये में बिकता है।
- नज़दीकी स्टोर के लिए सरकारी साइट देखें।
तो असल में क्या खरीद सकते हैं, और कितनी बचत होती है?
जन औषधि केंद्रों पर जेनेरिक दवाइयां बिकती हैं। ये ब्रांडेड दवाओं से सस्ती हैं, पर गुणवत्ता और असर में बराबर हैं।
2024 तक 2,000 से ज़्यादा तरह की जेनेरिक दवाइयां और 300 से ज़्यादा सर्जिकल सामान बिक रहे थे। पांच आयुर्वेदिक उत्पाद भी जोड़े गए।
पुरुषों और महिलाओं के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट भी ब्रांडेड से कम दाम पर मिलते हैं।
सुविधा सैनिटरी नैपकिन सभी केंद्रों पर 1 रुपये में बिकता है। अब तक 70 करोड़ से ज़्यादा नैपकिन बिक चुके हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन बिक्री से लोगों के 30,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा बचे हैं। दाम और सूची बदल सकते हैं, इसलिए ताज़ा जानकारी janaushadhi.gov.in पर देखें।
इसका फायदा किसे मिल सकता है, क्या कोई शर्त है?
यह योजना भारत में सभी के लिए खुली है। इसमें आय की कोई सीमा नहीं है और कोई कार्ड दिखाना ज़रूरी नहीं है।
कोई भी जन औषधि केंद्र में जाकर दवाई खरीद सकता है। इसके लिए गरीब होना या किसी खास वर्ग में होना ज़रूरी नहीं है।
अगर स्टोर पास में न हो, तो सरकारी साइट पर सबसे नज़दीकी स्टोर देखें।
यह योजना क्यों शुरू हुई, और इसमें क्या बदला?
यह योजना 2008 में जन औषधि योजना के नाम से शुरू हुई। 2016 में इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना किया गया।
इसे फार्मास्यूटिकल्स विभाग चलाता है, और भारतीय फार्मा पीएसयू ब्यूरो आपूर्ति का समन्वय करता है।
सरकार ने मार्च 2027 तक 25,000 केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा है। ताज़ा गिनती में लगभग 17,610 केंद्र चालू थे, जिनमें दक्षिणी राज्य आगे हैं।
कौन से कागज़ तैयार रखें?
प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाई के लिए डॉक्टर का वैध पर्चा (प्रिस्क्रिप्शन) ज़रूरी है।
पर्चा और बिल संभालकर रखें। कुछ दवाइयों के लिए कानूनन पर्चा चाहिए, इसलिए हर बार साथ रखें।
जन औषधि केंद्र से खरीदने के लिए आधार कार्ड या राशन कार्ड की ज़रूरत नहीं है।
स्टोर कैसे खोजें और खरीदें, एक-एक कदम?
janaushadhi.gov.in पर जाएं और स्टोर लोकेटर से नज़दीकी केंद्र खोजें।
पर्चे के साथ केंद्र पर जाएं। स्टाफ से अपनी दवाई का जेनेरिक नाम पूछें।
काउंटर पर भुगतान करें और बिल संभालकर रखें। दाम ब्रांड के दाम से कम होगा।
आप किसी स्थानीय केमिस्ट या फार्मासिस्ट से भी पूछ सकते हैं कि जेनेरिक वर्ज़न उपलब्ध है या नहीं।
केंद्र कैसे खोलें, या कुछ गड़बड़ हो तो मदद कहां मिले?
सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, निजी उद्यमी, फार्मासिस्ट और एनजीओ केंद्र खोल सकते हैं। कुछ केंद्रों के लिए 2.5 लाख रुपये तक की एकमुश्त मदद मिलती है।
केंद्र चलाने वालों को बिक्री पर प्रोत्साहन राशि मिलती है, जो आधिकारिक नियमों के अनुसार है। ताज़ा दरें सरकारी साइट पर देखें।
अगर दवाई उपलब्ध न हो या कोई शिकायत हो, तो janaushadhi.gov.in पर शिकायत का विकल्प इस्तेमाल करें।
केंद्र या सप्लाई दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले एजेंटों से सावधान रहें। भुगतान सिर्फ केंद्र के आधिकारिक काउंटर पर करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या जन औषधि की दवाइयां ब्रांडेड दवाओं जितनी अच्छी हैं?
हां, योजना के अनुसार जेनेरिक दवाइयां गुणवत्ता और असर में ब्रांडेड दवाओं के बराबर हैं। बिक्री से पहले इनकी जांच होती है।
क्या खरीदने के लिए कार्ड चाहिए?
नहीं। कोई भी बिना कार्ड या आय के प्रमाण के जन औषधि केंद्र से खरीद सकता है।
क्या सभी दवाइयों पर छूट मिलती है?
छूट जेनेरिक वर्ज़न पर है। कुछ ब्रांडेड दवाइयों का जेनेरिक वर्ज़न केंद्र पर उपलब्ध नहीं हो सकता।
नज़दीकी स्टोर कहां मिलेगा?
janaushadhi.gov.in के स्टोर लोकेटर का इस्तेमाल करें, या नज़दीकी केमिस्ट से पूछें।
क्या इसकी कोई उम्र सीमा है?
नहीं। किसी भी उम्र का व्यक्ति जन औषधि केंद्र से खरीद सकता है।
आधिकारिक लिंक
यह गाइड योजना के आधिकारिक नियमों पर आधारित है। नियम और रकम बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर ज़रूर जांचें। News Anek सरकारी वेबसाइट नहीं है।