यहां पूरी योजना एक जगह है: क्या मिलता है, कौन पात्र है, आवेदन कैसे करें, और क्या जांचें।
| योजना | पीएम पोषण (पहले राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन कार्यक्रम) |
|---|---|
| मंत्रालय | शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार |
| फायदा | हर स्कूल कार्य दिवस पर एक मुफ्त पका हुआ गर्म भोजन |
| कौन पा सकता है | सरकारी, सहायता प्राप्त और स्थानीय निकाय स्कूलों के बच्चे, बालवाटिका और प्री-प्राइमरी कक्षाओं सहित |
| खाना कैसे मिलता है | स्कूल में, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और उसकी खाद्य एजेंसियों के ज़रिए |
| कहां आवेदन करें | आवेदन की ज़रूरत नहीं। बच्चे का दाखिला सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल में करवाएं |
| माता-पिता का खर्च | मुफ्त |
एक नज़र में
- सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में खाना मुफ्त है।
- इसमें प्राथमिक कक्षाएं और बालवाटिका या प्री-प्राइमरी कक्षाएं शामिल हैं।
- अलग से आवेदन फॉर्म की ज़रूरत नहीं। स्कूल में दाखिला काफी है।
- खराब खाने या स्वच्छता की शिकायत स्कूल या जिला कार्यालय में कर सकते हैं।
तो बच्चे को असल में क्या मिलता है?
हर पात्र बच्चे को स्कूल के हर कार्य दिवस पर एक ताज़ा पका हुआ गर्म भोजन मिलता है।
खाने में तय न्यूनतम पोषण होना चाहिए। नर्सरी और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को कम से कम 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन मिलना चाहिए।
उच्च प्राथमिक और वरिष्ठ कक्षाओं के बच्चों को कम से कम 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन मिलना चाहिए।
हफ्ते भर मेन्यू गेहूं और चावल आधारित व्यंजनों में बारी-बारी से बदलता है। दाल, सब्ज़ी, खिचड़ी और छोले जैसे व्यंजन आम हैं।
नए दिशानिर्देशों से राशि और मेन्यू बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक साइट या स्कूल से पुष्टि करें।
खाना किसे मिलता है, और किसे नहीं?
यह भोजन सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकाय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए है।
इन स्कूलों से जुड़ी बालवाटिका और प्री-प्राइमरी कक्षाएं भी शामिल हैं।
निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चे इस योजना में शामिल नहीं हैं।
दाखिला होने और कार्य दिवस पर स्कूल आने से बच्चे को खाना मिलता है।
योजना क्यों शुरू हुई, और क्या बदला है?
मध्याह्न भोजन का विचार 1920 और 1960 के दशक में कुछ राज्यों में शुरू हुआ। केंद्र का कार्यक्रम 1995 में शुरू हुआ।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत इसे कानूनी हक बनाया गया।
2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2021-22 से 2025-26 के लिए पीएम पोषण को मंज़ूरी दी, बड़े केंद्रीय और राज्य बजट के साथ।
अब योजना में बालवाटिका के बच्चे भी शामिल हैं, और तिथि भोजन, स्कूल पोषण बगीचे व महिला स्वयं सहायता समूह भी इसमें भाग ले सकते हैं।
माता-पिता को कौन से कागज़ तैयार रखने चाहिए?
बच्चे का स्कूल दाखिला रिकॉर्ड और स्कूल में नामांकन तैयार रखें।
स्कूल का संपर्क विवरण और, अगर स्कूल मांगे, बच्चे का आधार रखें।
खाना शुरू होने के लिए अलग से कोई कागज़ नहीं लगता।
खाना कैसे मिलेगा, एक-एक कदम?
सबसे पहले बच्चे का दाखिला सरकारी, सहायता प्राप्त या स्थानीय निकाय स्कूल में करवाएं।
नामांकन के बाद स्कूल बच्चे को उस कक्षा की भोजन सूची में जोड़ता है।
खाना स्कूल कार्य दिवसों पर परोसा जाता है। अगर बच्चे को खाना नहीं मिल रहा, तो कक्षा शिक्षक या प्रधानाध्यापक से पूछें।
खाना खराब हो या भोजन छूट जाए तो क्या करें?
पहले कक्षा शिक्षक या प्रधानाध्यापक से बात करें। स्कूल को भोजन की गुणवत्ता और उपस्थिति का रिकॉर्ड रखना होता है।
आप यह मुद्दा ब्लॉक या जिला शिक्षा कार्यालय में भी उठा सकते हैं।
अगर खाना असुरक्षित है या कोई बीमार पड़ता है, तो तुरंत स्कूल और स्वास्थ्य विभाग को बताएं।
इस भोजन के लिए किसी को पैसे न दें। यह खाना मुफ्त है।
मदद कहां से मिलेगी?
दिशानिर्देश और जानकारी के लिए आधिकारिक पीएम पोषण पोर्टल pmposhan.education.gov.in देखें।
आपके स्कूल के प्रधानाध्यापक और ब्लॉक या जिला शिक्षा कार्यालय पहले संपर्क बिंदु हैं।
योजना के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें। ऐसी कॉल की जानकारी स्कूल या स्थानीय पुलिस को दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या खाने का कोई खर्च है?
नहीं। कवर स्कूलों में पात्र बच्चों के लिए भोजन मुफ्त है।
क्या अलग से आवेदन करना होगा?
अलग आवेदन की ज़रूरत नहीं। कवर स्कूल में दाखिला काफी है।
क्या स्कूल की छुट्टियों में भी खाना मिलता है?
नहीं। भोजन सिर्फ स्कूल कार्य दिवसों पर दिया जाता है।
क्या निजी स्कूल का बच्चा खाना पा सकता है?
नहीं। निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल इस योजना में कवर नहीं हैं।
ताज़ा दिशानिर्देश कहां देखूं?
pmposhan.education.gov.in पर जाएं या स्कूल के प्रधानाध्यापक से पूछें।
आधिकारिक लिंक
यह गाइड योजना के आधिकारिक नियमों पर आधारित है। नियम और रकम बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर ज़रूर जांचें। News Anek सरकारी वेबसाइट नहीं है।