बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार 1 दिसंबर से एक अभियान शुरू करेगी।
इसमें आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों और आयकर देने वालों से अपील की जाएगी कि वे अपनी मुफ्त बिजली अपनी मर्ज़ी से छोड़ें।
अभी पात्र परिवारों को 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ मिलता है। यूनिट बिजली की खपत मापने की वह इकाई है जो बिजली के बिल पर दिखती है।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा पटना की झुग्गी बस्तियों में दिवाली मनाने पहुंचने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए की।
उन्होंने कहा कि इस अपील का मकसद राज्य के संसाधनों का उपयोग विकास में करना है।
एक नज़र में
- 1 दिसंबर से संपन्न परिवारों को मुफ्त बिजली छोड़ने के लिए प्रेरित करने का अभियान शुरू होगा।
- राज्य हर साल बिजली सब्सिडी पर लगभग 23,000 करोड़ रुपये खर्च करता है।
- यह अपील प्रधानमंत्री मोदी की एलपीजी सब्सिडी छोड़ने की अपील जैसी है।
- प्रधानमंत्री 21 नवंबर को बिहार आने वाले हैं।
सरकार संपन्न परिवारों से सब्सिडी छोड़ने की अपील क्यों कर रही है?
मुख्यमंत्री ने पिछले हफ्ते पटना में एक युवा संसद में भी इसी तरह की अपील की थी।
उन्होंने कहा कि राज्य हर साल बिजली सब्सिडी पर लगभग 23,000 करोड़ रुपये खर्च करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर परिवार को सालाना लगभग 10,000 रुपये की बिजली सब्सिडी देती है।
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
इसलिए अमीर परिवारों पर खर्च होने वाला पैसा इस कुल रकम का बड़ा हिस्सा है।
उन्होंने अपनी अपील की तुलना प्रधानमंत्री मोदी की एलपीजी सब्सिडी छोड़ने की अपील से की।
चौधरी के मुताबिक जो लोग अपनी मर्ज़ी से यह लाभ छोड़ेंगे, उनके योगदान को सम्मानित किया जाएगा।
अभियान को लेकर आगे क्या होगा?
यह अभियान 1 दिसंबर से शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने यह पूरी तरह नहीं बताया कि लोग लाभ कैसे छोड़ सकेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी 21 नवंबर को बिहार आने वाले हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, वे इस दौरे में कई विकास और ढांचागत परियोजनाओं की घोषणा कर सकते हैं।
दिवाली पर उन्होंने अधिकारियों से क्या कहा?
चौधरी ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से आदिवासी इलाकों में जाने को कहा।
उन्होंने कहा कि वे दलित और अत्यंत पिछड़े समुदायों से मिलें और उनके साथ दिवाली मनाएं।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इन परिवारों की खुशी और दुख दोनों में शामिल होना चाहिए।
उनके शब्दों में, "त्योहार सबको मिलकर मनाना चाहिए, और कोई छूटना नहीं चाहिए।"
समझिए
पहले क्या हुआ
- मुख्यमंत्री ने पिछले हफ्ते पटना में एक युवा संसद में बिजली सब्सिडी पर अपील की थी।
- उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर साल बिजली सब्सिडी पर लगभग 23,000 करोड़ रुपये खर्च करती है।
- इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एलपीजी सब्सिडी छोड़ने की अपील की थी, और चौधरी ने कहा कि उनकी अपील भी वैसी ही है।
यह क्यों अहम है
राज्य सरकार चाहती है कि सार्वजनिक पैसा विकास में लगे, और इस अपील का असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिन्हें अभी मुफ्त बिजली मिलती है।
आगे क्या
- यह अभियान 1 दिसंबर से शुरू होगा।
- प्रधानमंत्री 21 नवंबर को बिहार आने वाले हैं और कई विकास और ढांचागत परियोजनाओं की घोषणा कर सकते हैं।