सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी खाने पर एक अस्थायी आदेश में बदलाव से इनकार कर दिया है।

शुक्रवार, 6 नवंबर को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने गुजरात हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में दखल नहीं दिया।
इस आदेश में मंदिर के पास मांसाहारी खाने की तैयारी, बिक्री और भंडारण पर फिर से पाबंदी लगाई गई है।
यह मामला रेस्टोरेंट चलाने वालों ने उठाया है। इनमें M/s Taj Restaurant भी शामिल है, जिसके मालिक आकिब अमीनभाई खान हैं।
उन्होंने 30 अक्टूबर के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
एक नज़र में
- सुप्रीम कोर्ट ने सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी खाने पर हाई कोर्ट का अस्थायी आदेश नहीं बदला।
- रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि दिवाली के दौरान इससे बड़ा नुकसान होगा।
- गुजरात सरकार का कहना है कि प्रतिबंधित इलाकों के बाहर मांसाहारी खाना परोसा जा सकता है।
- हाई कोर्ट को दो महीने के भीतर मुख्य अपील पर फैसला करना है।
रेस्टोरेंट मालिक अदालत क्यों गए?
वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी ने रेस्टोरेंट मालिकों की ओर से दलील दी।
उनका कहना था कि गुजरात पुलिस अधिनियम, 1951 अधिकारियों को मांसाहारी खाने की बिक्री पर स्थायी रोक लगाने की ताकत नहीं देता।
उन्होंने यह भी कहा कि ये कारोबार लगभग चार दशकों से कानूनी रूप से चल रहे हैं। उनके मुताबिक इन पाबंदियों से उनकी कमाई पर बुरा असर पड़ेगा।
अहमदी ने अदालत को बताया कि दिवाली रेस्टोरेंट के लिए अहम समय होता है। उनके अनुसार पाबंदियाँ जारी रहीं तो भारी नुकसान होगा।
अदालत और सरकार ने क्या कहा?
जस्टिस सुंदरेश ने पूछा कि तुरंत अंतरिम राहत देने की ज़रूरत क्यों है।
अहमदी ने यह सवाल भी उठाया कि बंद रेस्टोरेंट परिसर के अंदर मांसाहारी खाने पर रोक क्यों होनी चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता गुजरात सरकार की ओर से पेश हुए। उन्होंने पाबंदियों का बचाव किया।
उनका कहना था कि प्रतिष्ठान प्रतिबंधित इलाकों के बाहर मांसाहारी खाना परोस सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश अंतरिम है, इसलिए वह इसमें दखल देने के पक्ष में नहीं है।
अंतरिम आदेश वह अस्थायी आदेश होता है, जो अंतिम फैसले तक लागू रहता है।
तो आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका का निपटारा कर दिया।
यह वह याचिका थी, जिसके ज़रिए रेस्टोरेंट मालिकों ने सर्वोच्च अदालत से मामला सुनने का अनुरोध किया था।
अदालत ने गुजरात हाई कोर्ट से कहा कि लंबित अपील पर जल्दी सुनवाई करे। हाई कोर्ट को आदेश की कॉपी मिलने के दो महीने के भीतर इस पर फैसला करना है।
- 30 अक्टूबरगुजरात हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में मंदिर के पास मांसाहारी खाने पर फिर से पाबंदी लगी
- शुक्रवार, 6 नवंबरसुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में दखल देने से इनकार किया
- आदेश की कॉपी मिलने के बादहाई कोर्ट को दो महीने के भीतर लंबित अपील पर फैसला करना है
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
समझिए
पहले क्या हुआ
- 30 अक्टूबर को गुजरात हाई कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश दिया, जिसमें सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी खाने पर रोक फिर से लागू की गई।
- रेस्टोरेंट चलाने वालों का कहना है कि उनके प्रतिष्ठान लगभग चार दशकों से कानूनी रूप से चल रहे हैं।
यह क्यों अहम है
यह आदेश दिवाली के मौसम में रेस्टोरेंट के कारोबार को प्रभावित करता है। रेस्टोरेंट पक्ष का तर्क है कि गुजरात पुलिस अधिनियम, 1951 स्थायी रोक की इजाज़त नहीं देता।
आगे क्या
- हाई कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के दो महीने के भीतर लंबित अपील पर फैसला करना है।