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तेलंगाना हाईकोर्ट: फीस के बदले MBBS ग्रेजुएट के मूल सर्टिफिकेट लौटाने का आदेश

एक छात्र अपनी आखिरी साल की फीस नहीं दे पाया, तो कॉलेज ने उसके मूल सर्टिफिकेट रोक लिए। हाईकोर्ट ने इसे गैरकानूनी बताया और एक हफ्ते में दस्तावेज़ लौटाने को कहा। कॉलेज अपना पैसा कानूनी तरीके से वसूल सकता है।

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प्रतीकात्मक फोटो: Telangana High Court 10. Photo: Chanduclicks / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि कॉलेज बकाया फीस के बदले छात्र के मूल सर्टिफिकेट अपने पास नहीं रख सकता। यह आदेश 5 नवंबर को हैदराबाद में दिया गया।

Telangana High Court 2
प्रतीकात्मक फोटो: Telangana High Court 2। फोटो: Chanduclicks / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

यह याचिका एक MBBS ग्रेजुएट ने दायर की थी। MBBS एक मेडिकल डिग्री है। कोर्स पूरा होने के बाद भी उसके कॉलेज ने उसके मूल दस्तावेज़ अपने पास रखे थे।

इन दस्तावेज़ों में उसकी स्कूल और कॉलेज की मार्कशीट, NEET रैंक कार्ड और ट्रांसफर व माइग्रेशन सर्टिफिकेट शामिल थे।

NEET देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा है।

एक नज़र में

  • कोर्ट ने कहा कि बकाया फीस के बदले मूल सर्टिफिकेट रोकने का कॉलेज को कानूनी अधिकार नहीं है।
  • छात्र लगभग ₹11.75 लाख की आखिरी साल की फीस नहीं दे पाया, फिर भी उसने कोर्स पूरा किया।
  • कॉलेज और उसके प्रिंसिपल को आदेश मिलने के एक हफ्ते में दस्तावेज़ लौटाने होंगे।
  • फीस की बकाया रकम का फैसला नहीं हुआ है, इसलिए कॉलेज कानूनी तरीके से उसे वसूल सकता है।

इस मामले में क्या गड़बड़ हुई?

छात्र ने कोर्स के पहले चार सालों की लगभग ₹47.5 लाख फीस चुका दी थी। आर्थिक दिक्कतों की वजह से वह आखिरी साल की बाकी फीस नहीं दे पाया।

फीस के बदले सर्टिफिकेट रोकना गैरकानूनी: कोर्ट
₹47.5 लाखछात्र ने चुकाई पहले चार सालों की फीस
1 हफ्ताकॉलेज और प्रिंसिपल को सर्टिफिकेट लौटाने की समय सीमा
लगभग 1 सालछात्र का स्थायी रजिस्ट्रेशन या नौकरी के बिना इंतज़ार

ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से

फिर भी उसने कोर्स पूरा कर लिया। उसे यूनिवर्सिटी से अस्थायी सर्टिफिकेट मिला और एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप भी पूरी की।

उसने तेलंगाना मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन भी कराया। लेकिन उसकी मूल डिग्री सर्टिफिकेट की अर्जी प्रिंसिपल के पास लंबित दिखा रही थी।

छात्रों के लिए यह क्यों ज़रूरी है?

छात्र के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह लगभग एक साल से स्थायी मेडिकल रजिस्ट्रेशन या नौकरी नहीं पा सका है।

मूल दस्तावेज़ के बिना NEET PG 2026 काउंसलिंग की जांच भी नहीं हो पा रही थी।

NEET PG पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। काउंसलिंग में परीक्षा के बाद कॉलेज की सीट चुनी जाती है।

कोर्ट ने कहा कि अगर कॉलेज का पैसा बकाया है, तो उसे कानून के तरीके से ही वसूलना होगा। दस्तावेज़ गिरवी रखना पूरी तरह गैरकानूनी है।

आगे क्या होगा?

कोर्ट ने याचिका मंज़ूर करते हुए कॉलेज और उसके प्रिंसिपल को एक हफ्ते में सर्टिफिकेट लौटाने को कहा है। दोनों पक्षों पर खर्च का आदेश नहीं दिया गया।

नोटिस के बावजूद कॉलेज और उसका प्रिंसिपल सुनवाई में पेश नहीं हुए। यूनिवर्सिटी ने अपने वकील के ज़रिए याचिका का विरोध किया।

आदेश में यह नहीं बताया गया कि तय हफ्ते में दस्तावेज़ न लौटने पर क्या होगा। फीस की बकाया रकम पर भी इस आदेश में फैसला नहीं हुआ है।

समझिए

पहले क्या हुआ

  • छात्र ने MBBS कोर्स के पहले चार साल की लगभग ₹47.5 लाख फीस चुका दी थी।
  • वह आखिरी साल की लगभग ₹11.75 लाख की बाकी फीस नहीं दे पाया, फिर भी उसने कोर्स पूरा कर लिया।
  • उसे अस्थायी सर्टिफिकेट मिला और एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी की, पर डिग्री का आवेदन अब भी लंबित दिख रहा था।

यह क्यों अहम है

छात्र के मुताबिक मूल दस्तावेज़ न होने से वह लगभग एक साल से स्थायी मेडिकल रजिस्ट्रेशन या नौकरी नहीं पा सका।

आगे क्या

  • कोर्ट ने कॉलेज और उसके प्रिंसिपल को आदेश मिलने के एक हफ्ते में मूल सर्टिफिकेट लौटाने को कहा है।
  • आदेश में यह नहीं बताया गया कि तय समय में दस्तावेज़ न लौटाने पर क्या होगा।

स्रोत

देशतेलंगानासमझिए

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