महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की सीधी भर्ती के लिए ज़रूरी योग्यता साफ़ की है।
यह स्पष्टीकरण 6 नवंबर को उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग ने जारी किया।
उम्मीदवार के पास नेट, सेट या स्लेट पास होना चाहिए। इसके अलावा, यूजीसी के नियमों के तहत दी गई पीएचडी डिग्री भी मान्य है।
नेट राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा है, जिसे यूजीसी या काउंसिल ऑफ़ साइंटिफ़िक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) कराती है।
सेट को यूजीसी से मान्यता प्राप्त समकक्ष परीक्षा माना गया है।
एक नज़र में
- महाराष्ट्र के अनुसार नेट, सेट, स्लेट या यूजीसी नियमों वाली पीएचडी ज़रूरी है।
- यह नियम सहायक प्रोफेसर पदों की सीधी भर्ती पर लागू होता है।
- मार्च 2024 के आदेश से यह तय करने में उलझन हुई कि कौन सा नियम लागू होगा।
- सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को इस स्पष्टीकरण के अनुसार काम करना होगा।
तो यह उलझन आई कहाँ से?
2018 में यूजीसी ने विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर की सीधी भर्ती के लिए पीएचडी ज़रूरी की थी। यह 1 जुलाई 2021 से लागू होनी थी।
महाराष्ट्र ने इसे 8 मार्च 2019 के सरकारी प्रस्ताव से लागू किया।
जून 2023 में यूजीसी ने इस नियम में बदलाव किया। इसमें नेट, सेट या स्लेट को न्यूनतम योग्यता बनाया गया।
राज्य ने यह बदलाव 5 मार्च 2024 के प्रस्ताव से अपनाया।
लेकिन 2024 के प्रस्ताव में साफ़ नहीं लिखा था कि 2019 के प्रस्ताव का कौन सा पैराग्राफ बदला गया है।
इससे विश्वविद्यालय और कॉलेज यह तय नहीं कर पा रहे थे कि सही योग्यता क्या है।
- 2018यूजीसी ने विश्वविद्यालयों में सीधी भर्ती के लिए पीएचडी ज़रूरी की
- 8 मार्च 2019महाराष्ट्र ने सरकारी प्रस्ताव से यह नियम राज्य में लागू किया
- जून 2023यूजीसी ने नियम बदला और नेट, सेट या स्लेट को न्यूनतम योग्यता बनाया
- 5 मार्च 2024राज्य ने बदलाव अपनाया, पर प्रस्ताव में पैराग्राफ साफ़ नहीं लिखा था
- 6 नवंबरउच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग ने योग्यता पर स्पष्टीकरण जारी किया
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
नए पत्र में असल में क्या कहा गया है?
यह स्पष्टीकरण पुणे में उच्च शिक्षा के निदेशक को भेजे गए पत्र में है। पत्र विभाग के संयुक्त सचिव प्रताप पी. लुबे ने जारी किया है।
पत्र के अनुसार 2024 का बदलाव 2019 के प्रस्ताव के पैराग्राफ 4.10 से जुड़ा है।
इसमें राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर नियुक्ति की शर्तों का भी ज़िक्र है।
यूजीसी के 2009 या 2016 के नियमों के तहत पीएचडी करने वाले उम्मीदवारों को नेट या सेट की शर्त से छूट है।
बाकी उम्मीदवारों को यह परीक्षा पास करनी होगी।
अब कॉलेजों और उम्मीदवारों के लिए आगे क्या होगा?
सरकार ने सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को इन प्रावधानों के अनुसार ज़रूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है।
इसका मतलब है कि भर्ती इन्हीं स्पष्ट नियमों के हिसाब से होगी।
सरकार को उम्मीद है कि इससे भर्ती की प्रक्रिया में अनिश्चितता खत्म होगी।
विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और आवेदकों को सहायक प्रोफेसर पदों के लिए साफ़ आधार मिलेगा।
समझिए
पहले क्या हुआ
- यूजीसी ने 1 जुलाई 2021 से सहायक प्रोफेसर पदों के लिए पीएचडी को ज़रूरी किया था, और महाराष्ट्र ने यह 2019 के आदेश से लागू किया।
- जून 2023 में यूजीसी ने इसकी जगह नेट, सेट या स्लेट को न्यूनतम योग्यता बनाया। राज्य ने यह बदलाव मार्च 2024 में अपनाया।
- मार्च 2024 के आदेश में साफ़ नहीं लिखा था कि 2019 के आदेश का कौन सा पैराग्राफ बदला गया है।
यह क्यों अहम है
राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षक भर्ती इन नियमों पर निर्भर है, इसलिए उम्मीदवारों को साफ़ दिशा चाहिए थी।
आगे क्या
- सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को स्पष्ट किए गए प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।