कर्नाटक सरकार ने राज्य की 67 जगहों से पेट्रोल के नमूने जांच के लिए लिए हैं।
यह कदम इस शिकायत के बाद उठाया गया है कि पेट्रोल में ज़्यादा इथेनॉल मिलने से गाड़ियों के इंजन पर असर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने रविवार, 8 नवंबर 2026 को पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि सरकार इन शिकायतों को बहुत गंभीरता से ले रही है।
एक नज़र में
- कर्नाटक की 67 जगहों से पेट्रोल के नमूने लेकर उनकी जांच हुई है।
- शिकायत पेट्रोल में मिलाए गए 31.5 प्रतिशत इथेनॉल को लेकर है।
- हज़ारों वाहन चालकों का कहना है कि माइलेज घट गया है और इंजन बंद हो रहे हैं।
- संबंधित मंत्री सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
वाहन चालक किस बात की शिकायत कर रहे हैं?
मुख्यमंत्री के मुताबिक़ हज़ारों वाहन चालकों ने कई समस्याएं बताई हैं। इनमें माइलेज कम होना और तय दूरी न चल पाना शामिल है।
कुछ चालकों का कहना है कि गाड़ी चलते समय इंजन बंद हो जाता है। सरकार ने ये शिकायतें संबंधित मंत्री तक पहुंचा दी हैं।
जांच में किन चीज़ों को देखा गया?
मुख्यमंत्री ने बताया कि जांच केवल पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं रही। इथेनॉल मिलाने और उसके वितरण के चरणों की भी जांच की गई।
इसके अलावा यह जानकारी भी इकट्ठा की गई है कि मिश्रण कहां और कैसे किया जा रहा था। जांच के नतीजे अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
- 1पेट्रोल नमूने लेनाराज्य की 67 जगहों से पेट्रोल के नमूने जांच के लिए लिए गए।
- 2पंपों से आगे जांचजांच केवल पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं रही।
- 3मिश्रण और वितरण की जांचइथेनॉल मिलाने और उसके वितरण के चरणों की भी जांच की गई।
- 4मिश्रण का स्थान और तरीकाइकट्ठा किया गया कि मिश्रण कहां और कैसे किया जा रहा था।
- 5प्रेस कॉन्फ्रेंससोमवार को संबंधित मंत्री जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई की जानकारी देंगे।
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
तो आगे क्या होगा?
संबंधित मंत्री सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। वे जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई की जानकारी देंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने यह जानकारी केंद्र सरकार को भी भेजी है। उनके मुताबिक़ केंद्र इस मामले में अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि सस्ते इथेनॉल से मुनाफ़ा कमाने के लिए मिश्रण बढ़ाना सही नहीं है।
साथ ही उन्होंने भाजपा और जेडीएस के नेताओं, और विपक्ष के नेता आर अशोक की चुप्पी पर सवाल उठाए।
समझिए
पहले क्या हुआ
- हज़ारों वाहन चालकों ने माइलेज कम होने, तय दूरी न चल पाने और चलते समय इंजन बंद होने की शिकायत की है।
- पेट्रोल पंपों के साथ-साथ इथेनॉल मिश्रण और वितरण के चरणों की भी जांच की गई।
यह क्यों अहम है
मुख्यमंत्री के मुताबिक़ वाहन का प्रदर्शन, ईंधन की गुणवत्ता और सार्वजनिक सुरक्षा अहम हैं, और केंद्र को इस पर ज़िम्मेदारी लेनी होगी।
आगे क्या
- संबंधित मंत्री सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई की जानकारी देंगे।