हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा और पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की है।
इसका मुख्य मकसद शासन को बेहतर बनाना और सरकारी सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान करना है।
प्रशासनिक इकाइयां वे हिस्से हैं, जिनमें सरकार अपने भूभाग और काम को बांटती है। इनमें ज़िले, उप-मंडल, तहसील, उप-तहसील और विकास खंड शामिल हैं।
हर इकाई उस इलाके में सरकारी काम चलाने में मदद करती है।
प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए बने आयोग की पहली बैठक शनिवार को हुई।
इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी कर रहे हैं, जो हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं।
एक नज़र में
- राज्य में ज़िलों, तहसीलों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों की समीक्षा शुरू हुई है।
- आयोग की पहली बैठक शनिवार को हुई।
- आबादी, भौगोलिक स्थिति और सुविधा जैसी बातों को फैसलों का आधार बनाया जाएगा।
- आयोग चाहता है कि किसी भी बदलाव से राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
पहली बैठक में आयोग ने किन बातों पर चर्चा की?
आयोग ने राज्य के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे पर विचार किया।
इसके साथ ही यह तय करने के तरीकों पर भी चर्चा शुरू हुई कि किसी इकाई को कब बनाया, मिलाया, बांटा या पुनर्गठित किया जाए।
आबादी, भौगोलिक स्थिति, पहुंच, प्रशासनिक कुशलता और लोगों की सुविधा को मुख्य आधार माना गया है।
आयोग ने कहा कि इस प्रक्रिया में लोगों को केंद्र में रखा जाएगा, खासकर दूर-दराज़ और कठिन इलाकों को।
आयोग को ज़रूरी जानकारी कैसे मिलेगी?
आयोग संबंधित विभागों और उपायुक्तों से जनसांख्यिकीय आंकड़े और प्रशासनिक ब्योरा मांगेगा।
यह जानकारी मौजूदा व्यवस्था का पूरा आकलन करने के लिए ज़रूरी है।
आयोग जन प्रतिनिधियों, संबंधित पक्षों और सरकारी विभागों से भी बातचीत करेगा। यह प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगी।
- 1मौजूदा व्यवस्था की जांचआयोग पहले राज्य के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे की विस्तार से जांच करेगा।
- 2आंकड़े और ब्योरा जुटानासंबंधित विभागों और उपायुक्तों से जनसांख्यिकीय आंकड़े और प्रशासनिक ब्योरा मांगा जाएगा।
- 3बातचीत का चरणजन प्रतिनिधियों, संबंधित पक्षों और सरकारी विभागों से बातचीत की जाएगी।
- 4जानकारी और सुझाव मांगनाआगे बढ़ने से पहले आयोग जानकारी और सुझाव मांगेगा। अभी काम जानकारी जुटाने के चरण में है।
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क्या इससे सरकार पर ज़्यादा खर्च होगा?
बैठक में आर्थिक पहलू पर भी बात हुई। इसमें बुनियादी ढांचे का निर्माण और कर्मचारियों की ज़रूरतें शामिल हैं।
आयोग ने कहा कि किसी भी बदलाव में उपलब्ध संसाधनों का अच्छा इस्तेमाल होना चाहिए। साथ ही राज्य के खज़ाने पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
आगे क्या होगा?
आयोग ने पहले मौजूदा व्यवस्था की विस्तार से जांच करने का फैसला किया है। आगे बढ़ने से पहले वह जानकारी और सुझाव मांगेगा।
स्रोतों में अंतिम बदलावों की कोई तारीख नहीं बताई गई है। फिलहाल काम जानकारी जुटाने के चरण में है।