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राजनीति

प्रधानमंत्री मोदी ने एलके आडवाणी के 100वें वर्ष पर लिखा श्रद्धा भरा लेख

आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को सिंध में हुआ था। इस साल उनका जन्मदिन दिवाली पर पड़ा है। लेख में उनके विचारों, भाजपा को मज़बूत करने के काम और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनके रिश्ते की चर्चा है।

Parliament of India in New Delhi 02
प्रतीकात्मक फोटो: Parliament of India in New Delhi 02. Photo: Pinakpani / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी आज अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर एक हस्ताक्षर वाला लेख लिखा है।

आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को सिंध में हुआ था। वे पूर्व उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं। इस साल उनका जन्मदिन दिवाली पर पड़ा है।

एक नज़र में

  • मोदी ने जन्मदिन, 8 नवंबर पर, आडवाणी की तारीफ़ में लेख लिखा है।
  • आडवाणी का जन्म 1927 में हुआ और आज वे जीवन के 100वें वर्ष में हैं।
  • मोदी ने उनकी साफ़ सोच और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लंबी साझेदारी की सराहना की।
  • लेख में भाजपा को खड़ा करने में उनकी भूमिका भी याद की गई है।

प्रधानमंत्री ने आडवाणी की सोच के बारे में क्या कहा?

मोदी के मुताबिक़ आडवाणी को नेता के तौर पर दो खूबियाँ अलग बनाती हैं। पहली है उनकी साफ़ सोच और तेज़ बौद्धिक समझ।

दूसरी है वह तरीका, जिससे उन्होंने वह सोच खुलकर सामने रखी।

मोदी ने कहा कि आडवाणी के भाषणों, लेखों और इंटरव्यू में ये खूबियाँ दिखती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जनसंघ के लिए उनके लिखे प्रस्ताव आज भी पढ़ने लायक हैं।

मोदी ने इस जन्मदिन को कुछ और अहम पड़ावों से भी जोड़ा। इनमें जनसंघ के 75 वर्ष, डॉ.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती और आरएसएस के हाल ही में पूरे हुए 100 वर्ष शामिल हैं।

आडवाणी के समय में भाजपा कैसे बढ़ी?

मोदी ने कहा कि आडवाणी के भाजपा अध्यक्ष रहते कांग्रेस की सीटें तेज़ी से गिरीं। 1989 में ये 400 से घटकर 200 से कम हो गईं।

1996 में पहली बार भाजपा सबसे बड़ी एकल पार्टी बनी। इसका मतलब है कि उसने किसी भी दूसरी अकेली पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं।

एलके आडवाणी: प्रमुख पड़ाव
  1. 8 नवंबर 1927आडवाणी का जन्म सिंध में हुआ था
  2. 1947विभाजन के दौरान सिंध में अपनी जानी-पहचानी दुनिया छोड़नी पड़ी
  3. 1989कांग्रेस की सीटें 400 से घटकर 200 से कम हो गईं
  4. 1996भाजपा पहली बार सबसे बड़ी एकल पार्टी बनी

ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से

मोदी ने कहा कि आडवाणी ने कई पीढ़ियों के कार्यकर्ता तैयार किए। उन्होंने पार्टी को राष्ट्र पहले के सिद्धांत पर एक साफ़ आधार दिया।

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनके रिश्ते पर क्या कहा गया?

मोदी ने लिखा कि दो नेताओं का दशकों तक साथ काम करना और प्रतिद्वंद्वी न बनना दुर्लभ है। उनके मुताबिक़ आडवाणी और वाजपेयी ने यही करके दिखाया।

मोदी ने यह भी लिखा कि दोनों ने मिलकर भारतीय राजनीति की दिशा बदली। वाजपेयी भी पूर्व प्रधानमंत्री रहे हैं।

लेख में आडवाणी के शुरुआती जीवन की बात भी है। 1947 में विभाजन के दौरान, युवा अवस्था में, उन्हें सिंध में अपनी जानी-पहचानी दुनिया छोड़नी पड़ी।

मोदी ने उनके किताबों, सिनेमा, रंगमंच और सिंधी संस्कृति के प्रेम के बारे में भी लिखा है। पूरा लेख अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों में प्रकाशित हुआ है।

समझिए

पहले क्या हुआ

  • मोदी ने कहा कि आडवाणी ने जनसंघ और बाद में भाजपा को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई।
  • 1989 में, आडवाणी के भाजपा अध्यक्ष रहते हुए, कांग्रेस की सीटें 400 से घटकर 200 से कम हो गईं।
  • 1996 में पहली बार भाजपा सबसे बड़ी एकल पार्टी बनी, मोदी ने यह बात अपने लेख में कही।

यह क्यों अहम है

यह लेख प्रधानमंत्री की ओर से एक वरिष्ठ नेता के लिए निजी श्रद्धा भरा संदेश है, और इसमें भारतीय दलीय राजनीति के कुछ अहम पड़ावों का ज़िक्र है।

आगे क्या

  • पूरा लेख अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों में प्रकाशित हुआ है।

स्रोत

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