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कारोबार

मुहूर्त ट्रेडिंग 2026: संवत 2083 की शुरुआत पर सेंसेक्स, निफ्टी में गिरावट

मुहूर्त ट्रेडिंग दिवाली पर होने वाला छोटा और प्रतीकात्मक सत्र है, जो नए हिंदू वित्तीय वर्ष की शुरुआत बताता है। इस बार बाज़ार नीचे बंद हुआ और इस सत्र में लंबे समय से चली आ रही बढ़त रुक गई।

Joe and Jill Biden visit India (2013-07) 09
प्रतीकात्मक फोटो: Joe and Jill Biden visit India (2013-07) 09. Photo: David Lienemann / Wikimedia Commons, Public domain

रविवार, 8 नवंबर 2026 को भारत के दो बड़े शेयर सूचकांक थोड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई का सेंसेक्स 28.62 अंक गिरकर 80,999.40 पर बंद हुआ।

एनएसई का निफ्टी 50, 43.95 अंक गिरकर 24,986.40 पर पहुंचा और 25,000 के स्तर से नीचे आ गया। बीएसई और एनएसई भारत के दो बड़े शेयर बाज़ार हैं।

सेंसेक्स 30 बड़ी कंपनियों और निफ्टी 50 कंपनियों की चाल दिखाता है। यह सत्र दिवाली पर हुए मुहूर्त ट्रेडिंग का था।

मुहूर्त का मतलब शुभ समय होता है। कई निवेशक मानते हैं कि इस समय किया गया कारोबार समृद्धि लाता है।

इसी के साथ संवत 2083 की शुरुआत हुई, जो हिंदू वित्तीय वर्ष है।

यह सत्र बहुत छोटा होता है। इस बार विशेष सत्र दोपहर 2:20 बजे से 3:30 बजे तक चला। आम दिनों में कारोबार सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक होता है।

एक नज़र में

  • मुहूर्त सत्र में सेंसेक्स 28.62 अंक गिरकर 80,999.40 पर बंद हुआ।
  • निफ्टी 43.95 अंक गिरकर 24,986.40 पर बंद हुआ, जो 25,000 से नीचे है।
  • मुहूर्त सत्र 2017 के बाद पहली बार नीचे बंद हुआ।
  • नियमित बाज़ार में सात सत्रों की लगातार तेज़ी भी रुक गई।

तो यह गिरावट क्यों अहम है?

मुहूर्त सत्र लगातार आठ साल तक बढ़त के साथ बंद हुआ था। रविवार की गिरावट ने यह सिलसिला तोड़ दिया।

अलग से, नियमित बाज़ार शुक्रवार, 6 नवंबर तक सात सत्रों तक चढ़ता रहा था। रविवार की गिरावट ने वह तेज़ी भी रोक दी।

30 अक्टूबर से 6 नवंबर के बीच सेंसेक्स में 8.82 प्रतिशत की बढ़त आई। यह फरवरी 2021 के बाद की सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त थी।

बाज़ार पर दबाव किस वजह से है?

मध्य पूर्व में तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच, 2026 में वैश्विक बाज़ारों को बेचैन रखे हुए है। इससे कच्चे तेल के दाम भी बढ़े हैं।

ब्रेंट कच्चा तेल 2026 की शुरुआत में लगभग 61 डॉलर प्रति बैरल था। नवंबर की शुरुआत में यह लगभग 107 डॉलर पर था।

कच्चा तेल: 61 से 107 डॉलर तक पहुंचा
2026 की शुरुआत61
नवंबर की शुरुआत107

डॉलर प्रति बैरल

ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से

भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 80 प्रतिशत से ज़्यादा आयात करता है।

तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ सकती है, यानी रोज़मर्रा की चीज़ें महंगी हो सकती हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) ने 2026 में भारतीय शेयर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के बेचे। यह लगातार छठा साल है जब उनकी शुद्ध बिकवाली हुई है।

निवेशक आगे क्या देखें?

नाइन रिवर्स कैपिटल के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) संदीप दागा ने कहा कि हाल की तेज़ी को लंबे समय का उछाल नहीं मानना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक के लिए महंगाई बड़ी चिंता बनी हुई है।

ब्याज दरें बढ़ रही हैं, और छोटी कंपनियों के शेयरों में तेज़ उतार-चढ़ाव हो सकता है।

अगर आप शेयर या म्यूचुअल फंड रखते हैं, तो 0.04 प्रतिशत की गिरावट बहुत छोटी है। एक सत्र से पूरी तस्वीर नहीं बनती।

एग्ज़ाम कॉर्नर

UPSC जीएस पेपर 3 · अर्थव्यवस्था: शेयर बाज़ार और कच्चा तेल

क्या है खबर

8 नवंबर 2026 को मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी थोड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।

पृष्ठभूमि

  • मुहूर्त ट्रेडिंग दिवाली पर होने वाला छोटा और प्रतीकात्मक सत्र है, जो नए हिंदू वित्तीय वर्ष की शुरुआत बताता है।
  • भारत अपने कच्चे तेल की 80 प्रतिशत से ज़्यादा ज़रूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 2026 में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे, जो लगातार छठा साल है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • सेंसेक्स बीएसई के 30 शेयरों का बेंचमार्क सूचकांक है।
  • निफ्टी 50 एनएसई के 50 शेयरों का बेंचमार्क सूचकांक है।
  • ब्रेंट कच्चा तेल 7 अप्रैल 2026 को 138.21 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।

मेन्स के लिए सामग्री

  1. महत्व: शेयर सूचकांक निवेशकों के रुख, कंपनियों की कमाई और अर्थव्यवस्था की स्थिति दिखाते हैं।
  2. मुख्य मुद्दा: मध्य पूर्व का तनाव और ऊंचे कच्चे तेल के दाम बाज़ार और महंगाई पर दबाव डाल रहे हैं।
  3. चुनौतियां: ऊंची ब्याज दरें, लगातार महंगाई और विदेशी बिकवाली बाज़ार को अस्थिर बनाती हैं।
  4. आगे का रास्ता: एसआईपी से घरेलू लंबी अवधि का निवेश और कमाई व मूल्यांकन पर ध्यान बाज़ार को स्थिरता दे सकता है।

अभ्यास प्रश्न: चर्चा कीजिए कि वैश्विक कच्चे तेल के दाम और विदेशी संस्थागत निवेश भारत के शेयर बाज़ार और अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करते हैं।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

Q1. कौन सा सूचकांक बीएसई के 30 शेयरों पर आधारित है?

  1. निफ्टी 50
  2. ब्रेंट
  3. सेंसेक्स
  4. संवत
उत्तर देखें

उत्तर: C. लेख के मुताबिक सेंसेक्स बीएसई के 30 शेयरों का सूचकांक है।

Q2. लेख के अनुसार भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का कितना हिस्सा आयात करता है?

  1. 10 प्रतिशत से कम
  2. लगभग 50 प्रतिशत
  3. 80 प्रतिशत से ज़्यादा
  4. कुछ नहीं, सारा तेल देश में बनता है
उत्तर देखें

उत्तर: C. लेख में कहा गया है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 80 प्रतिशत से ज़्यादा आयात करता है।

मुख्य शब्द

  • मुहूर्त ट्रेडिंग: दिवाली पर होने वाला छोटा विशेष कारोबार सत्र, जिसे शुभ माना जाता है।
  • FII: विदेशी संस्थागत निवेशक, जो किसी दूसरे देश के शेयरों में बड़ा निवेश करते हैं।
  • SIP: सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान, जिसमें म्यूचुअल फंड में हर महीने एक तय रकम लगाई जाती है।

परीक्षा की तैयारी के लिए और खबरें: UPSC Today

ये बातें इस खबर की रिपोर्ट से ली गई हैं। परीक्षा से पहले NCERT किताबों और PIB जैसे मानक स्रोतों से ज़रूर मिलाएं।


स्रोत

कारोबारUPSC Todayजीएस पेपर 3

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