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दुनिया

भारतीय नागरिक के मतदान मामले में AI से बनी दलीलों पर अमेरिकी जज की नाराज़गी

4 नवंबर को एक अमेरिकी संघीय जज ने खलविंदर सिंह भेंगुरा की सज़ा से पहले रिहाई की मांग ठुकरा दी। जज ने वकीलों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

Thurgood Marshall United States Courthouse 008
प्रतीकात्मक फोटो: Thurgood Marshall United States Courthouse 008. Photo: Kidfly182 / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

अमेरिका की एक संघीय अदालत के जज ने तीन वकीलों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इनकी अदालती दलीलों को "स्पष्ट AI स्लॉप" कहा।

ये दलीलें खलविंदर सिंह भेंगुरा के मामले में दाखिल की गई थीं। वह 70 वर्ष के भारतीय नागरिक हैं।

एक नज़र में

  • खलविंदर सिंह भेंगुरा को 27 अक्टूबर को 2024 के संघीय चुनाव में अवैध मतदान का दोषी ठहराया गया।
  • जज ने 4 नवंबर के आदेश में सज़ा से पहले उनकी रिहाई की मांग ठुकरा दी।
  • वकीलों की याचिका के कुछ हिस्से जनरेटिव AI टूल की मदद से बनाए गए थे, यानी ऐसा सॉफ्टवेयर जो टेक्स्ट तैयार करता है।
  • सज़ा की सुनवाई 11 फरवरी, 2027 को तय है।

जज को किस बात पर आपत्ति थी?

वकीलों ने भेंगुरा की तुरंत रिहाई मांगी थी। उनका तर्क था कि सज़ा के दिशानिर्देश शून्य से छह महीने की कैद की सिफारिश करते हैं।

AI दलीलों पर जज की नाराज़गी: मुख्य तथ्य
0 से 6 महीनेसज़ा के दिशानिर्देशों की सिफारिश
11 फरवरी, 2027भेंगुरा की सज़ा की सुनवाई
70 वर्षखलविंदर सिंह भेंगुरा की उम्र

ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से

जज इससे सहमत नहीं हुए।

जज मार्क पिटमैन ने इसे "कानून की एक बेहद गलत व्याख्या" कहा। कानून यानी संसद या विधायिका में पारित लिखित नियम।

उन्होंने इसे "सुस्त वकालत" भी कहा। उनके अनुसार यह दिखाता है कि AI से दलीलें लिखवाने के कितने खतरे हैं।

वकीलों ने आलोचना पर क्या कहा?

वकीलों ने आलोचना को ठुकरा दिया। उनका कहना है कि AI की मदद से मसौदा बनाने वाले टूल का इस्तेमाल अदालत के नियमों का उल्लंघन नहीं है।

निकोल नॉक्स ने कहा, "हमारे पास छिपाने को कुछ नहीं है।" मारियो हेरेरा ने कहा कि उन्होंने दलीलें खुद लिखीं, जांचीं और अंतिम रूप दिया।

हेरेरा के अनुसार, जज का किसी दलील से असहमत होना पेशेवर कदाचार के बराबर नहीं है।

आगे क्या होगा, और यह क्यों मायने रखता है?

जज ने संकेत दिया कि कार्रवाई उचित है। लेकिन समय-सारणी की वजह से थैंक्सगिविंग से पहले सुनवाई नहीं हो सकती।

इस कार्रवाई में नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ टेक्सस में वकालत करने पर रोक भी शामिल हो सकती है। भेंगुरा की सज़ा की सुनवाई 11 फरवरी, 2027 को तय है।

तो यह मामला एक अदालत से आगे क्यों मायने रखता है? आज कई लोग काम और पढ़ाई में AI टूल इस्तेमाल करते हैं।

जज की चेतावनी याद दिलाती है कि ऐसी सामग्री को ध्यान से परखना ज़रूरी है।

समझिए

पहले क्या हुआ

  • खलविंदर सिंह भेंगुरा, 70 वर्ष, को 27 अक्टूबर को अमेरिकी नागरिकता का झूठा दावा कर मतदान पंजीकृत कराने का दोषी ठहराया गया।
  • उन्हें 2024 के संघीय चुनाव में अवैध मतदान का भी दोषी ठहराया गया। इसके बाद उनके वकीलों ने सज़ा से पहले रिहाई मांगी।
  • 4 नवंबर को जज मार्क पिटमैन ने रिहाई की मांग ठुकरा दी और वकीलों के AI इस्तेमाल की आलोचना की।

यह क्यों अहम है

भारत के पाठकों के लिए यह दिखाता है कि विदेशी अदालतें कानूनी काम में AI के इस्तेमाल को कैसे परख रही हैं।

आगे क्या

  • जज ने संकेत दिया कि कार्रवाई उचित है, पर थैंक्सगिविंग से पहले सुनवाई नहीं हो सकती। सज़ा की सुनवाई 11 फरवरी, 2027 को तय है।

स्रोत

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