पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक हफ्ते चले विशेष नशा-विरोधी अभियान में 378 लोगों को गिरफ़्तार किया।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
यह अभियान 31 अक्टूबर से 7 नवंबर तक चला। इसमें नशे की तस्करी और अवैध गांजे की खेती पर रोक लगाने पर ज़ोर था।
गांजा भांग के पौधे से बनने वाला नशीला पदार्थ है। इस दौरान पुलिस ने लगभग ₹64 करोड़ के नशीले पदार्थ जब्त किए।
एक नज़र में
- पूरे राज्य में एक हफ्ते के विशेष अभियान में 378 लोग गिरफ़्तार हुए।
- लगभग ₹64 करोड़ के नशीले पदार्थ जब्त हुए और NDPS कानून के तहत 212 मामले दर्ज हुए।
- 300 बीघा में अवैध गांजे की फसल नष्ट की गई, जिससे लगभग 10,000 किलो उपज का अनुमान था।
- ₹1 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई और 110 आरोपियों के खिलाफ 68 वित्तीय जाँच शुरू हुईं।
पुलिस ने असल में क्या जब्त किया?
नशीले पदार्थों के अलावा पुलिस ने ₹17 लाख नकद भी जब्त किए। एक लाख मतलब सौ हज़ार रुपये।
मुख्यमंत्री के मुताबिक इसी दौरान लगभग ₹101 करोड़ के जब्त नशीले पदार्थ निपटाए गए। निपटाने का मतलब कानून के मुताबिक उन्हें नष्ट करना है।
करोड़ ₹
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
NDPS कानून नशीले पदार्थों और साइकोट्रॉपिक पदार्थों से जुड़ा केंद्रीय कानून है। इसी के तहत 212 मामले दर्ज हुए।
गांजे की खेती पर कितनी बड़ी कार्रवाई हुई?
अवैध गांजा 300 बीघा ज़मीन में उगाया गया था। बीघा ज़मीन नापने की एक पारंपरिक इकाई है।
अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक इस फसल से लगभग 10,000 किलो उपज होती। पुलिस ने यह पूरी खेती नष्ट कर दी।
तो आगे क्या होगा?
अभियान में ₹1 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई। कुर्क करने का मतलब है कि संपत्ति जाँच के दौरान रोक ली गई है।
110 आरोपियों के खिलाफ 68 वित्तीय जाँच शुरू हुईं। ये जाँच नशे की तस्करी से जुड़े पैसे पर केंद्रित हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नशीले पदार्थों के प्रति ज़ीरो-टॉलरेंस नीति पर चल रही है।
उन्होंने राष्ट्रीय अभियान नशा मुक्त भारत अभियान के तहत पुलिसकर्मियों के काम की सराहना की।
इस अभियान में नशे के नुकसान पर 215 जन-जागरूकता अभियान भी चलाए गए।