राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने ओडिशा में 318 और पीजी (पोस्टग्रेजुएट) मेडिकल सीटों को मंज़ूरी दी है।
इससे राज्य में कुल सीटें 620 से बढ़कर 938 हो गई हैं।
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
पीजी सीटें उन डॉक्टरों के लिए होती हैं जो बुनियादी मेडिकल डिग्री के बाद कोई विशेषज्ञ कोर्स करना चाहते हैं।
NMC भारत में मेडिकल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय संस्था है।
ये नई सीटें 14 विभागों में बाँटी गई हैं।
इनमें एनाटॉमी, एनेस्थीसियोलॉजी, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, पीडियाट्रिक्स और साइकियाट्री जैसे विभाग शामिल हैं।
एक नज़र में
- ओडिशा में 318 नई पीजी मेडिकल सीटों को मंज़ूरी मिली।
- राज्य में कुल सीटें 620 से बढ़कर 938 हो गईं।
- पाँच नए सरकारी मेडिकल कॉलेज अब पीजी कोर्स शुरू कर सकेंगे, जिनमें 153 सीटें हैं।
- सीटें राज्य के 14 विभागों में फैली हैं।
नए मेडिकल कॉलेजों को क्या मिला?
पाँच राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेज और संस्थान नई सीटें पा रहे हैं। इनमें से कुछ को पहली बार पीजी कोर्स मिलेगा।
केओंझर के धरणीधर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को 10 विभागों में 44 सीटें मिली हैं।
सुंदरगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को आठ विभागों में 22 सीटें मिली हैं।
कोरापुट के SLN मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को 28 सीटें मिली हैं। तालचेर के पबित्र मोहन प्रधान सरकारी मेडिकल कॉलेज को 32 सीटें मिली हैं।
फुलबनी के स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती सरकारी मेडिकल कॉलेज को 27 सीटें मिली हैं।
पहले से चल रहे किन कॉलेजों को ज़्यादा सीटें मिलीं?
कई कॉलेज, जहाँ पहले से पीजी कोर्स चल रहे हैं, उन्हें भी बड़ा हिस्सा मिला है। उनकी सीटों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है।
बारीपदा के पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सीटें 20 से बढ़कर 53 हो गई हैं।
बलांगीर के भीमा भोई मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सीटें 10 से बढ़कर 54 हुई हैं।
बालासोर के फकीर मोहन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सीटें आठ से बढ़कर 54 हो गई हैं।
भुवनेश्वर के PGIMER और कैपिटल अस्पताल को 11 अतिरिक्त सीटें मिली हैं।
तो इसका असर मरीज़ों पर क्या पड़ेगा?
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग ने इसे एक बड़ा कदम बताया।
उन्होंने कहा कि इससे राज्य में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को नई दिशा मिली है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व को इसका श्रेय दिया।
ज़्यादा प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर स्थानीय अस्पतालों में मरीज़ों की बेहतर सेवा करने में मदद कर सकते हैं।